दिल्ली धमाका मामला: NIA ने कश्मीर में कई जगहों पर तलाशी ली

Delhi blast case: NIA conducts searches at multiple locations in Kashmir
(File Photo/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की टीमों ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर 2025 के लाल किला धमाका मामले की जांच के सिलसिले में तलाशी ली।

अधिकारियों ने बताया कि NIA की टीमों ने आज सुबह धमाका मामले के सिलसिले में हंदवाड़ा के गुलोरा इलाके में एक कारोबारी के घर पर छापा मारा। NIA की टीमों ने, J&K पुलिस और CRPF की मदद से, परिसर की तलाशी ली और दस्तावेज़ों तथा उपकरणों की जांच की।
एजेंसी के एक बयान में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में नौ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

एक अधिकारी ने आगे बताया कि “NIA ने दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके की चल रही जांच के तहत कश्मीर भर में कई जगहों पर छापे मारे।” ये छापे श्रीनगर, बारामूला, कुपवाड़ा और कुलगाम ज़िलों में छह जगहों पर उन लोगों से जुड़े परिसरों पर मारे गए, जिन्हें धमाके के पीछे के “आतंकी मॉड्यूल” के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था; इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य घायल हो गए थे।

सूत्रों ने बताया कि NIA ने बारामूला ज़िले के रफ़ीआबाद के रहने वाले डॉ. बिलाल नसीर मल्ला के घर पर तलाशी ली, जिन्हें इस मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। एक और तलाशी कुपवाड़ा ज़िले के लंगाते इलाके में ली गई। NIA ने बम धमाका मामले की जांच के दौरान अब तक कई डॉक्टरों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।

मुख्य आरोपी, डॉ. उमर उन नबी, भी इस जानलेवा धमाके में मारा गया था। अधिकारियों ने बताया कि NIA की टीमों ने, पुलिस और CRPF की मदद से, परिसर की तलाशी ली और दस्तावेज़ों तथा उपकरणों की जांच की। यह ज़िक्र करना ज़रूरी है कि 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली के लाल किले पर एक वाहन-जनित इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) में धमाका हुआ था। इस हमले की साज़िश पेशेवरों की एक “व्हाइट-कॉलर” सेल ने रची थी, जिसमें अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर भी शामिल थे; ये लोग जैश-ए-मोहम्मद और अंसार ग़ज़वत-उल हिंद जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों से जुड़े थे।

इस घटना ने सीमा-केंद्रित उग्रवाद से हटकर शहरी इलाकों में छिपे रहकर ऑपरेशन करने की दिशा में एक संभावित बदलाव का संकेत दिया, जहाँ आतंकी बड़े शहरों की गुमनामी और देश के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद लॉजिस्टिक नेटवर्क का फ़ायदा उठाते हैं।

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