ज़िला अस्पतालों की “लाइव मॉनिटरिंग” होगी: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषणा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि स्वास्थ्य विभाग राज्य के ज़िला अस्पतालों की “लाइव मॉनिटरिंग” शुरू करेगा, ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में फैली बुराइयों को खत्म किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों के कामकाज की इस लाइव मॉनिटरिंग के ज़रिए सरकार तीन पुरानी समस्याओं को दूर करना चाहती है: ड्यूटी के समय डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी, बिना किसी ठोस वजह के मरीज़ों को कोलकाता के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में रेफर करना, और दलालों का नेटवर्क।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके बिधाननगर में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम के मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा, “ज़िला अस्पतालों के कामकाज पर नज़र रखने के लिए 24 घंटे चलने वाला एक कंट्रोल रूम होगा। हम ऐसे पेशेवर लोगों को नियुक्त कर रहे हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि अस्पतालों में कोई दलाल सक्रिय न हो और किसी भी मरीज़ को बेवजह रेफर न किया जाए। इस मामले में सरकार ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि मरीज़ या उनके परिवार के सदस्य इस उद्देश्य के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम के विशेष नंबर पर डायल करके अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
यह प्रणाली मुख्य रूप से ज़िला अस्पतालों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी लागू होगी। इस लाइव मॉनिटरिंग को ‘स्वास्थ्य भवन’ से नियंत्रित किया जाएगा, जो कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके सॉल्ट लेक में स्थित राज्य के स्वास्थ्य विभाग का मुख्यालय है।
इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के लगभग छह करोड़ लोगों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ के दायरे में लाया जाएगा। यह योजना राज्य की अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ की जगह लेगी, जिसे पश्चिम बंगाल में पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने शुरू किया था।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने उत्तरी बंगाल में ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS) की प्रस्तावित इकाई स्थापित करने के लिए ज़मीन की तलाश पहले ही शुरू कर दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन निजी अस्पतालों ने पिछली सरकार से महज़ 1 रुपये की कीमत पर ज़मीन हासिल की थी, उन्हें अब अनिवार्य रूप से अपने अस्पतालों में ‘मुफ़्त बेड’ की व्यवस्था लागू करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “आर्थिक रूप से कमज़ोर पृष्ठभूमि से आने वाले मरीज़ों को वहाँ इलाज की सुविधाएँ पूरी तरह मुफ़्त मिलेंगी।”
