मुकुल चौधरी: उभरता हुआ मैच फिनिशर
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: राजस्थान के झुंझुनूं से आने वाले मुकुल चौधरी भारतीय क्रिकेट के उन नए चेहरों में शामिल हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले मुकुल के क्रिकेट सफर में उनके पिता दलीप कुमार चौधरी का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने सीमित सुविधाओं के बावजूद बेटे को बेहतर प्रशिक्षण दिलाने के लिए सीकर और फिर जयपुर तक का सफर तय किया।
शुरुआत में मुकुल एक मीडियम-फास्ट गेंदबाज़ थे, लेकिन टीम की जरूरत के चलते उन्होंने विकेटकीपिंग अपनाई। इस भूमिका में ढलने के लिए उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरणा भारतीय दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी से मिली, और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित कर लिया।
घरेलू क्रिकेट में उनका असली ब्रेक 2025 के अंडर-23 स्टेट ए ट्रॉफी में आया, जहां उन्होंने 617 रन बनाकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में लगभग 200 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने खुद को एक खतरनाक फिनिशर के रूप में साबित किया। यही प्रदर्शन उन्हें आईपीएल तक ले गया, जहां लखनऊ सुपर जायंट्स ने 2026 की नीलामी में उन्हें 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा। टीम के कोच जस्टिन लैंगर और एनालिस्ट श्रीनिवास की नजर उन पर पहले ही पड़ चुकी थी, और उन्होंने इस युवा खिलाड़ी पर भरोसा जताया।
आईपीएल में धमाकेदार पहचान
आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ ईडन गार्डन्स में खेली गई उनकी नाबाद 54 रन की पारी ने उन्हें रातोंरात चर्चा में ला दिया। जब मैच लगभग हाथ से निकल चुका था, तब मुकुल ने कार्तिक त्यागी और कैमरन ग्रीन जैसे गेंदबाज़ों पर आक्रमण करते हुए मैच का रुख पलट दिया और आखिरी गेंद पर टीम को जीत दिलाई। उनकी बल्लेबाज़ी में आक्रामकता के साथ-साथ शानदार गेम सेंस भी दिखता है। रनिंग बिटवीन द विकेट्स में उनकी तुलना विराट कोहली से की जाती है, जबकि फिनिशिंग क्षमता में कोच ने उनके अंदर टिम डेविड और आंद्रे रसेल जैसे खिलाड़ियों की झलक देखी है।
सिर्फ 22 साल की उम्र में मुकुल चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि वह दबाव में भी शांत रहकर मैच खत्म कर सकते हैं। उनकी मेहनत, समझ और सीखने की भूख उन्हें आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा नाम बना सकती है।
