आलिया भट्ट बोलीं, फिल्मों को सिर्फ पुरुषों को खुश करने के लिए क्यों बनाया जाए

Alia Bhatt asked: "Why should films be made solely to please men?"
(Pic Credit: Instagram/@aliabhatt)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: आलिया भट्ट ने भारतीय सिनेमा में लंबे समय से चली आ रही उस सोच पर सवाल उठाया है, जिसमें फिल्मों को मुख्य रूप से पुरुष दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। उनका मानना है कि सिनेमा का उद्देश्य किसी एक जेंडर को खुश करना नहीं, बल्कि ऐसी कहानियां कहना होना चाहिए जो हर दर्शक से जुड़ सकें।

79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ से बातचीत में अभिनेत्री और निर्माता आलिया भट्ट ने कहा कि आज ग्लोबल बॉक्स ऑफिस यह साबित कर चुका है कि महिला-केंद्रित फिल्में भी बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने Barbie और The Devil Wears Prada 2 जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया भर में दर्शक अब मजबूत महिला किरदारों और अलग तरह की कहानियों को खुलकर स्वीकार कर रहे हैं।

 

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आलिया ने कहा कि भारत में अक्सर बॉक्स ऑफिस पर चर्चा करते समय यह मान लिया जाता है कि ज्यादातर दर्शक पुरुष हैं, इसलिए फिल्मों को “मास ऑडियंस” के नाम पर उसी नजरिए से तैयार किया जाता है। उनके मुताबिक, यह सोच सीमित है, क्योंकि सिनेमा देखने वाली महिलाओं की संख्या भी बहुत बड़ी है और उनकी पसंद-नापसंद को बराबर महत्व मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह मायने नहीं रखना चाहिए कि फिल्म का मुख्य किरदार पुरुष है या महिला। सबसे ज्यादा अहमियत कहानी की होनी चाहिए।”

आलिया भट्ट ने इस बात पर जोर दिया कि वह पुरुषों को सिनेमा से अलग करने की बात नहीं कर रहीं, बल्कि वह फिल्मों को ज्यादा समावेशी बनाने की वकालत कर रही हैं। उनका मानना है कि सिनेमा को “जेंडर-न्यूट्रल” होना चाहिए, जहां अच्छी कहानी, मजबूत किरदार और भावनात्मक जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण हों।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमाघरों में और ज्यादा महिला-प्रधान फिल्में देखने को मिलेंगी, जो न सिर्फ आलोचनात्मक सराहना हासिल करेंगी बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी सफलता दर्ज करेंगी।

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