अमेरिकी विदेश यंत्री मार्को रूबियो ने की पीएम मोदी से मुलाकात, ट्रम्प का व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा समेत कई अहम मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस दौरान रुबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया।
मार्को रुबियो की यह तीन दिवसीय भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध व्यापार और ऊर्जा को लेकर उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। ईरान संघर्ष के कारण दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी दूत सर्जियो गोर, जो रुबियो के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में मौजूद थे, ने बताया कि बातचीत में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर भी चर्चा हुई, जहां चीन लगातार अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका लंबे समय से भारत को इस क्षेत्र में चीन के संतुलन के रूप में देखता रहा है।
सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमने सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों में अमेरिका-भारत सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर सकारात्मक चर्चा की। भारत, अमेरिका का एक अहम साझेदार है।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया गया है।
बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों को भारत के लिए बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को विविधता मिल सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।
रुबियो ने कहा, “अमेरिका ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक नहीं बनाने देगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने लिखा,
“हमने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में लगातार प्रगति और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका वैश्विक हित के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप से आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी, जब ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी व्हाइट हाउस पहुंचने वाले शुरुआती वैश्विक नेताओं में शामिल थे। उस दौरान ट्रंप ने मोदी को “महान मित्र” बताया था और दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था।
हालांकि, इसके बाद अमेरिका ने रूस से तेल खरीद जारी रखने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिए थे। व्हाइट हाउस का दावा था कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को आर्थिक मदद मिल रही है। बाद में फरवरी में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की रूपरेखा बनने के बाद स्थिति में सुधार आया और अमेरिका ने भारतीय आयात पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया।
इस बीच, ईरान युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर टल गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की अगली मुलाकात अगले महीने फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है, जहां भारत को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया है।
मार्को रुबियो की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रुबियो ने अपनी यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की, जहां उन्होंने मदर हाउस पहुंचकर मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय का दौरा किया। किसी शीर्ष अमेरिकी अधिकारी की यह 14 वर्षों बाद पहली कोलकाता यात्रा मानी जा रही है।
रुबियो 26 मई को क्वाड देशों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
