मद्रास हाई कोर्ट का यहां फैसला, हर मुस्लिम धार्मिक संस्थान वक्फ़ संपत्ति नहीं

Madras High Court rules: Not every Muslim religious institution is Waqf property.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: एक अहम फ़ैसले में, मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी दरगाह या मुस्लिम धार्मिक संस्थान के होने से ही वह अपने-आप ‘वक्फ़ संपत्ति’ नहीं बन जाती, और वक्फ़ बोर्ड वक्फ़ एक्ट के तहत संपत्ति का कानूनी दर्जा तय किए बिना उस पर अपना अधिकार नहीं जमा सकता।

कोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ़ बोर्ड के उस प्रस्ताव को रद्द कर दिया जिसमें चेन्नई के ट्रिपलिकेन इलाके में मौजूद 240 साल पुरानी दरगाह को वक्फ़ संपत्ति घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि कानून में बताई गई कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना संस्थान पर नियंत्रण करने का अधिकार बोर्ड के पास नहीं है।

फ़ैसला सुनाते हुए जस्टिस के. गोविंदराजन थिलाकावडी ने कहा, “सिर्फ़ दरगाह के होने से ही बोर्ड को अधिकार नहीं मिल जाता, जब तक कि संस्थान को कानून के मुताबिक वक्फ़ के तौर पर स्थापित या माना न गया हो।”

जज ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बोर्ड सिर्फ़ इसलिए अपना अधिकार नहीं बढ़ा सकता कि किसी संपत्ति पर कोई धार्मिक ढांचा या दरगाह मौजूद है। उन्होंने आगे कहा कि “संस्थान पर नियंत्रण करने से पहले बोर्ड को अधिकार क्षेत्र से जुड़े तथ्यों को साबित करना होगा।” यह विवाद तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु वक्फ़ बोर्ड ने ऐतिहासिक ट्रिपलिकेन दरगाह को वक्फ़ संपत्ति घोषित करने का प्रस्ताव पास किया।

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