पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई, उत्तर प्रदेश से सात लोग गिरफ्तार

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (16 जून) को एक इंटरनेशनल टेररिस्ट-क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, जिसके तार पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से जुड़े थे। पुलिस ने इसके सात सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनमें से छह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले थे।
इससे पहले मार्च 2026 में, गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान में रहने वाले गैंगस्टर से टेररिस्ट बने शहजाद भट्टी से जुड़े 21 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दो महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे, जो मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और खासकर गाजियाबाद से थे।
आर्मी बेस और रेलवे स्टेशनों की निगरानी
14 मार्च को कौशांबी पुलिस को भोवापुर इलाके में कुछ युवाओं के संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की खबर मिली। जानकारी से पता चला कि ये लोग रेलवे स्टेशनों, आर्मी ठिकानों और दूसरी अहम जगहों के वीडियो और फोटो ले रहे थे और उन्हें विदेश में अपने कॉन्टैक्ट्स के साथ शेयर कर रहे थे। यह भी पता चला कि पैसों के लिए युवाओं को भर्ती किया जा रहा था।
पुलिस ने पांच पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया। इसके बाद हुई जांच में जासूसों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिन्हें भविष्य में बड़े आतंकी हमलों की तैयारी के लिए भारत की सेना के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के काम पर रखा गया था।
पाकिस्तान में बैठे हैंडलर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारत में युवाओं को भर्ती करते थे और उन्हें बताते थे कि किन जगहों की रेकी करनी है और कौन सी खास जानकारी जुटानी है।
उनके निशाने पर वे लोग होते थे जिनके पास टेक्निकल स्किल्स हों, जैसे मोबाइल मैकेनिक, CCTV ऑपरेटर या कंप्यूटर की जानकारी रखने वाले लोग। वे 5,000 से 20,000 रुपये तक के पेमेंट के बदले रेलवे स्टेशनों, आर्मी बेस और दूसरी अहम जगहों की फोटो, वीडियो और GPS कोऑर्डिनेट लेते थे। उन्हें डेटा भेजने के लिए एक खास मोबाइल ऐप चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी।
शक से बचने के लिए महिलाओं और नाबालिगों को भी भर्ती किया जाता था। जांच से पता चला कि गाजियाबाद में गिरफ्तार किए गए छह लोगों में से चार पुलवामा गए थे। वहां रहते हुए उन्होंने पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारी भेजी थी। सूत्रों के मुताबिक, पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में एक और बड़े हमले की साजिश रची जा रही थी।
आरोपी दिल्ली और जम्मू के बीच हर बड़े रेलवे स्टेशन पर सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे लगाने की तैयारी कर रहे थे। इन कैमरों का मकसद सेना की आवाजाही और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नज़र रखना था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ऐसे कैमरे पहले ही दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगाए जा चुके थे।
