मानसून सत्र में सरकार का बड़ा दांव! ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल लाने की तैयारी, दो-तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती

Government's bold move for the Monsoon Session! Preparations underway to introduce the 'One Nation, One Election' bill; challenge lies in securing a two-thirds majority.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और यह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। केंद्र सरकार इस सत्र में संविधान संशोधन से जुड़े कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें सबसे महत्वाकांक्षी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) विधेयक प्रमुख माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बार दोनों सदनों में संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में है। अप्रैल में परिसीमन (Delimitation) विधेयक को आगे बढ़ाने में आई मुश्किलों के बाद सरकार ने इस बार संख्या बल मजबूत करने के लिए व्यापक राजनीतिक प्रयास किए हैं। सूत्रों का दावा है कि सरकार को इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

JPC की रिपोर्ट के बाद बढ़ सकती है प्रक्रिया

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक पिछले साल शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्ष के तीखे विरोध के बाद इसे जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया था।

JPC का कार्यकाल अब मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन यानी 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। यदि समिति तय समय तक अपनी रिपोर्ट सौंप देती है, तो सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर संशोधित विधेयक संसद में पेश कर सकती है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार सत्र के अंतिम चार दिनों में इस महत्वपूर्ण विधेयक को दोनों सदनों से पारित करा पाएगी।

क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का प्रस्ताव?

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की योजना है। विधेयक के अनुसार, 2029 में नई लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति पहली बैठक की एक निश्चित तिथि अधिसूचित करेंगे। इसके बाद जिन राज्यों में अलग-अलग समय पर विधानसभा चुनाव होंगे, उनकी विधानसभाओं का कार्यकाल 2034 के लोकसभा चुनावों तक सीमित रहेगा, ताकि 2034 से पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी राज्य में 2031 में विधानसभा चुनाव होते हैं, तो उस विधानसभा का कार्यकाल केवल 2034 तक यानी तीन वर्ष का ही होगा।

दो-तिहाई बहुमत सबसे बड़ी चुनौती

चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना अनिवार्य होगा।

लोकसभा की मौजूदा प्रभावी सदस्य संख्या 540 है। ऐसे में सरकार को लगभग 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास साधारण बहुमत तो है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत अभी भी चुनौती बना हुआ है।

जब दिसंबर 2024 में यह विधेयक JPC को भेजा गया था, तब इसके पक्ष में 269 वोट पड़े थे, जबकि 198 सांसदों ने विरोध किया था। वहीं महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर सरकार को 298 वोट मिले थे, जबकि 230 वोट विपक्ष के पक्ष में गए थे।

सरकार को बढ़त मिलने की उम्मीद

सूत्रों के अनुसार, पिछली बार की तुलना में सरकार की स्थिति अब पहले से बेहतर मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सत्तापक्ष का समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के आठ सांसदों के समर्थन की भी उम्मीद जताई जा रही है।

फिर भी सरकार के लिए DMK के 22 सांसदों सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करना या कम से कम मतदान के दौरान उनकी अनुपस्थिति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती रहेगा।

राज्यसभा में भी NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है। यदि संसद से यह विधेयक पारित हो जाता है, तब भी इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। संविधान संशोधन लागू करने के लिए देश की कम से कम आधी राज्य विधानसभाओं से इसकी पुष्टि (Ratification) आवश्यक होगी।

सरकार का मानना है कि विभिन्न राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए यह चरण अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

विपक्ष का कड़ा विरोध

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, आम आदमी पार्टी समेत INDIA गठबंधन के कई दलों का कहना है कि यह प्रस्ताव भारत की संघीय व्यवस्था (Federalism) की भावना के खिलाफ है। विपक्ष का तर्क है कि इससे क्षेत्रीय मुद्दे और क्षेत्रीय दल कमजोर होंगे तथा राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता प्रभावित होगी।

विपक्ष यह सवाल भी उठा रहा है कि यदि किसी राज्य की सरकार कार्यकाल के बीच में गिर जाती है, तो उस स्थिति में लोकतांत्रिक प्रक्रिया कैसे संचालित होगी।

2029 तक लागू करने की तैयारी

केंद्र सरकार की कोशिश है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इस बड़े चुनावी सुधार की दिशा में संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए विपक्ष के समर्थन या कुछ दलों के वॉकआउट के बिना संसद के दोनों सदनों से इस विधेयक को पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

आने वाले मानसून सत्र में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

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