घुटने की चोट से टूटा सपना, भावुक हुए तेजस्विन शंकर; बोले- ‘मैं यहां छुट्टियां मनाने नहीं आया’
चिरौरी न्यूज
ग्लासगो: भारत के स्टार एथलीट और हाई जंपर तेजस्विन शंकर के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का हाई जंप फाइनल बेहद भावुक पल लेकर आया। प्रतियोगिता शुरू होने से ठीक पहले घुटने की चोट उभर आने के कारण वे पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में हिस्सा नहीं ले सके। मेडल के प्रबल दावेदार माने जा रहे तेजस्विन जब मीडिया से रूबरू हुए तो अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और उनकी आंखें नम हो गईं।
बर्मिंघम 2022 में हाई जंप का कांस्य पदक जीतने वाले तेजस्विन इस बार शानदार फॉर्म में ग्लासगो पहुंचे थे। उन्हें भरोसा था कि वह इस बार स्वर्ण पदक जीत सकते हैं या कम से कम अपने नाम एक और कॉमनवेल्थ पदक जोड़ेंगे। लेकिन प्रतियोगिता के दिन घुटने की पुरानी समस्या फिर उभर आई और उनका सपना अधूरा रह गया।
फाइनल से पहले ही टूटा सपना
हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें DNS (Did Not Start) यानी प्रतियोगिता शुरू नहीं करने वाला खिलाड़ी दर्ज किया गया, लेकिन तेजस्विन ने आखिरी क्षण तक उम्मीद नहीं छोड़ी। वे मैदान पर आए और एक बार प्रयास करने की भी कोशिश की, लेकिन दर्द इतना अधिक था कि उन्हें बिना कोई जंप लगाए ही बाहर होना पड़ा।
यह दृश्य भारतीय दल के लिए बेहद निराशाजनक था। जिस खिलाड़ी से पदक की सबसे बड़ी उम्मीद थी, वह मैदान के किनारे बैठकर उसी मुकाबले को देख रहा था, जिसमें वह इतिहास रचने का सपना लेकर आया था।
भावुक तेजस्विन ने कहा, “हर हाई जंपर को कभी न कभी चोट का सामना करना पड़ता है। लेकिन साल के 365 दिनों में यही वह दिन था, जब आप बिल्कुल नहीं चाहते कि चोट दोबारा उभरे… और दुर्भाग्य से आज ही ऐसा हो गया।”
उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह स्वर्ण पदक या कम से कम पदक के लिए चुनौती पेश कर सकते थे। “मैं बेहतरीन फॉर्म में था। अपनी पहली जंप से पहले मुझे पूरा भरोसा था कि मेरा दिन शानदार रहने वाला है। लेकिन प्रतियोगिता में उतर ही नहीं पाना सबसे ज्यादा दर्द देता है।”
पुरानी चोट ने बिगाड़ा खेल
तेजस्विन ने बताया कि यह कोई नई या असामान्य चोट नहीं है, बल्कि घुटने के पटेला टेंडन (Patellar Tendon) पर अधिक दबाव पड़ने से होने वाली सामान्य समस्या है, जिससे कई हाई जंप और लॉन्ग जंप खिलाड़ी जूझते हैं।
उन्होंने कहा, “यह ऐसी चोट है जिससे लगभग हर एथलीट गुजरता है। मैंने भी इसे पहले संभाला है, लेकिन आज यह फिर सामने आ गई और मेरा पूरा दिन खराब कर दिया। मैं खुद को समझाने की कोशिश कर रहा हूं क्योंकि मैं मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार था।”
चोट के बावजूद तेजस्विन ने प्रतियोगिता बीच में नहीं छोड़ी। वे पूरे समय मैदान के किनारे मौजूद रहे और भारतीय हाई जंपर सर्वेश कुशारे तथा आदर्श राम जोथी का उत्साह बढ़ाते रहे। जब सर्वेश 2.25 मीटर की ऊंचाई पार करने की पहली दो कोशिशों में असफल रहे, तब तेजस्विन ने उन्हें रणनीति बदलने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “क्यों न 2.25 मीटर छोड़कर सीधे 2.28 मीटर की कोशिश करो? अगर तुम इसे पार कर गए तो गोल्ड जीत सकते हो।” हालांकि सर्वेश ने यह जोखिम नहीं लिया। उन्होंने तीसरे प्रयास में 2.25 मीटर सफलतापूर्वक पार किया और अंततः रजत पदक अपने नाम किया।
सर्वेश कुशारे कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष हाई जंप स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। इससे पहले इसी साल उन्होंने 2.30 मीटर की छलांग लगाकर तेजस्विन शंकर का आठ साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ा था।
जहां सर्वेश पोडियम पर पहुंचने का जश्न मना रहे थे, वहीं तेजस्विन उस अधूरे मुकाबले के दर्द से जूझ रहे थे, जिसे जीतने का उन्हें पूरा भरोसा था।
अब डेकाथलॉन पर नजर
हाई जंप से बाहर होने के बावजूद तेजस्विन ने हार नहीं मानी है। उन्हें अभी डेकाथलॉन समेत कई अन्य स्पर्धाओं में हिस्सा लेना है और वह वापसी के लिए हर संभव कोशिश करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास अभी दो दिन हैं। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि फिट होकर वापसी कर सकूं। मैं यहां छुट्टियां मनाने नहीं आया हूं। मैं मैदान में उतरूंगा और फिर देखेंगे क्या होता है।”
उन्होंने आगे कहा, “इस टेंडन पर सबसे ज्यादा दबाव हाई जंप और लॉन्ग जंप में पड़ता है। अगर मैं किसी तरह इन दोनों स्पर्धाओं को संभाल गया, तो बाकी इवेंट्स में मुझे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।”
हार नहीं मानने का जज़्बा
टेंडन की चोट से उबरने के लिए समय बेहद कम है, लेकिन तेजस्विन शंकर उम्मीद नहीं छोड़ रहे। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की टीम उनके साथ है और वह अगले दो दिनों में पूरी मेहनत से फिट होने की कोशिश करेंगे। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, “मेरे साथ बेहतरीन विशेषज्ञ हैं। मुझे भरोसा है कि मैं वापसी कर सकता हूं। मैं आखिरी दम तक कोशिश करूंगा।”
