पुतिन का G7 पर तंज: दुनिया की GDP में BRICS की हिस्सेदारी 40%

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए BRICS और G7 की आर्थिक ताकत की तुलना की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की GDP का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा BRICS देशों से आया है, जबकि G7 की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही है।
पुतिन ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में दुनिया की GDP का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा BRICS देशों में पैदा हुआ है, जबकि तथाकथित G7 की हिस्सेदारी केवल 29 प्रतिशत है।” उन्होंने कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है और पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस समय दुनिया में गहरे और संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। आर्थिक विकास के पुराने केंद्रों की जगह अब नए इंजन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
मोदी ने भी BRICS की आर्थिक ताकत का किया जिक्र
BRICS बिजनेस फोरम के समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संगठन की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज BRICS देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत GDP और वैश्विक व्यापार के 25 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जहां वैश्विक GDP लगभग ढाई गुना बढ़ी है, वहीं BRICS देशों की संयुक्त GDP करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है। उनके मुताबिक, इसका मतलब है कि BRICS की आर्थिक ताकत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि BRICS देश वैश्विक इनोवेशन और नए समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में आयोजित यह बिजनेस फोरम अब तक का सबसे बड़ा BRICS बिजनेस फोरम है।
21 सदस्य देशों तक पहुंचा BRICS
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरते देशों के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हुए।
इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इसके पार्टनर देश हैं। इस तरह BRICS का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
पुतिन और मोदी के बीच द्विपक्षीय बातचीत
18वें BRICS शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने द्विपक्षीय मुलाकात भी की। इस साल दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच संपर्क समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्ष समेत कई अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर कहा कि संघर्षों को सुलझाने का रास्ता बातचीत और कूटनीति से होकर जाता है। उन्होंने शांति प्रयासों में सहयोग के लिए भारत की तत्परता भी दोहराई।
पुतिन ने मोदी को रूस आने का दिया न्योता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया है। सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की आपसी सहमति और राजनयिक माध्यमों से तय की जाएगी।
बैठक के बाद मोदी और पुतिन ने एक ही कार में साथ यात्रा भी की। हाल के वर्षों में दोनों नेताओं का इस तरह साथ कार में सफर करने का यह चौथा मौका था।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख कायम
31 अगस्त को बिश्केक में पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि भारत शांति की दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
मोदी ने कहा था कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद पैदा करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को अंतहीन युद्ध से बाहर निकलने और संघर्ष का समाधान तलाशने की जरूरत है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। इससे पहले 2022 में समरकंद में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा था कि “आज का युग युद्ध का युग नहीं है।”
