33 सिर्फ एक नंबर है: भारतीय टेस्ट टीम में मौका मिलने पर बोले सारांश जैन
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के अनुभवी ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन का वर्षों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। 33 वर्षीय जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। उन्हें चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम में मौका मिला है। चयन के बाद जैन ने कहा कि उन्होंने कभी भी भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का सपना नहीं छोड़ा और उन्हें हमेशा विश्वास था कि एक दिन यह मौका जरूर मिलेगा।
जियोस्टार से बातचीत में सारांश जैन ने कहा कि उम्र उनके लिए कभी बाधा नहीं बनी।
उन्होंने कहा, “33 साल सिर्फ एक नंबर है। आज के समय में फिटनेस और फील्डिंग का स्तर इतना ऊंचा है कि मैदान पर उम्र दिखाई नहीं देती। मुझे पूरा भरोसा था कि अगर इस बार भारतीय टीम में जगह नहीं मिली, तो अगले एक-दो साल में जरूर मिल जाएगी। मुझे हमेशा विश्वास था कि मैं भारत के लिए खेलूंगा।”
सारांश जैन ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए के लिए लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हालिया घरेलू सीजन में उन्होंने सेंट्रल जोन को दलीप ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 136 रन बनाए और 16 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का पुरस्कार जीता।
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में उन्होंने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में शतक लगाया और मैच में कुल आठ विकेट लेकर सेंट्रल जोन को छह विकेट से जीत दिलाई।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड
सारांश जैन का प्रथम श्रेणी क्रिकेट रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 31.75 की औसत से 2,223 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतक शामिल हैं। वहीं गेंदबाजी में उन्होंने 27.30 की औसत से 188 विकेट अपने नाम किए हैं।
जैन ने बताया कि 2014-15 रणजी ट्रॉफी सीजन में तमिलनाडु के खिलाफ पदार्पण मैच में पांच विकेट लेने के बाद उन्हें विश्वास हो गया था कि वह बड़े स्तर पर सफल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “उस मैच में दिनेश कार्तिक जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे। तभी मुझे एहसास हुआ कि अगर मेहनत और अनुशासन बनाए रखा जाए तो क्रिकेट उतना मुश्किल नहीं है। मैंने हमेशा उन्हीं चीजों पर ध्यान दिया जो मेरे नियंत्रण में थीं और आज उसी का परिणाम है कि मैं भारतीय टीम का हिस्सा हूं।”
‘लगातार एक ही जगह गेंद डालना मेरी सबसे बड़ी ताकत’
ऑफ स्पिनर जैन का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत हमेशा निरंतरता रही है। उन्होंने कहा, “मैं बार-बार एक ही जगह गेंद डालने की कोशिश करता हूं, क्योंकि अंततः बल्लेबाज रन बनाने के लिए जोखिम उठाता है। मैं श्रीलंका की पिचों या विकेटों के बारे में ज्यादा नहीं सोच रहा, बल्कि अपनी बुनियादी ताकत पर भरोसा रखूंगा।”
सारांश जैन ने बताया कि बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक सप्ताह के कैंप के दौरान पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह से मिली सलाह ने उनके करियर पर गहरा प्रभाव डाला।
उन्होंने कहा, “हरभजन पाजी ने मुझसे कहा था कि कुछ हासिल करने के लिए कुछ खोना जरूरी नहीं है, बल्कि लगातार मेहनत करना जरूरी है। उनकी यह बात आज भी मुझे प्रेरित करती है।”
पिता को बताया सबसे बड़ा आदर्श
सारांश जैन ने अपने पिता और पूर्व मध्य प्रदेश ऑफ स्पिनर सुबोध जैन को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, “मैंने क्रिकेट खेलना अपने पिता की वजह से शुरू किया। मैं उन्हीं के लिए क्रिकेट खेलता हूं और वही मेरे सबसे बड़े आदर्श हैं।”
उन्होंने अपने परिवार का भी आभार जताते हुए कहा कि कठिन समय में परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। “भारतीय टीम के 15 खिलाड़ियों में जगह बनाना आसान नहीं है। कई मुश्किल दौर आए, लेकिन परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। आज मैं भारत के लिए खेल रहा हूं, तो उसमें मेरे परिवार का सबसे बड़ा योगदान है। मेरा सपना हमेशा भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना था और अब वह सपना पूरा होने जा रहा है।”
