देश में आरक्षण विरोधी आवाजें तेज, ऑनलाइन अभियान से लेकर सड़कों तक बढ़ी गतिविधियां
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: देश में जाति आधारित आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। पिछले कुछ सप्ताहों में सोशल मीडिया अभियानों, विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों और छात्र समूहों की गतिविधियों ने आरक्षण नीति पर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि यह आंदोलन अभी अलग-अलग समूहों तक सीमित है और किसी एक साझा नेतृत्व के तहत नहीं है।
आरक्षण विरोधी अभियान को उस समय अधिक चर्चा मिली जब NEET पेपर लीक पर एक टीवी बहस के दौरान छात्र हर्ष दुबे ने आरक्षण व्यवस्था को छात्रों की परेशानी और आत्महत्या जैसे मामलों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ा अभियान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA)’ नामक अभियान तेजी से चर्चा में आया है। यह मंच जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और उसमें बदलाव की मांग कर रहा है। अभियान से जुड़े लोग आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने, न्यूनतम योग्यता अंक तय करने, आरक्षण का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन करने और चुनावों के दौरान नए आरक्षण वादों पर रोक जैसी मांगें उठा रहे हैं।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य पहले राष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर खुली चर्चा शुरू करना है, न कि तत्काल बड़े पैमाने पर आंदोलन करना।
हाल के दिनों में महाराष्ट्र के नागपुर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, राजस्थान के जयपुर और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आरक्षण और UGC के 2026 इक्विटी नियमों के विरोध में प्रदर्शन हुए।
नागपुर में आरक्षण विरोधी रैली आयोजित की गई, जिसे आंदोलन की शुरुआत बताया गया। वहीं लखनऊ में कुछ संगठनों ने जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने और UGC नियम वापस लेने की मांग उठाई।
जयपुर में करणी सेना का प्रदर्शन
राजस्थान की राजधानी जयपुर में श्री राजपूत करणी सेना ने UGC के 2026 इक्विटी रेगुलेशन वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के बाद संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का विरोध करने की बात कही।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
आरक्षण विरोधी समूहों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण।
- एक परिवार को केवल एक बार आरक्षण का लाभ।
- सभी वर्गों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक अनिवार्य करना।
- खाली रह जाने वाली आरक्षित सीटों को सामान्य वर्ग में स्थानांतरित करना।
- आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा।
- चुनावों के दौरान नए आरक्षण वादों पर रोक लगाने की व्यवस्था।
सरकार और विशेषज्ञों का पक्ष
इस बीच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण विरोधी अभियानों की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान द्वारा दिया गया आरक्षण पूरी तरह सुरक्षित है और इसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भी केंद्र सरकार द्वारा गठित जी. रोहिणी आयोग और बी.पी. शर्मा समिति ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार संबंधी सुझाव दिए थे, लेकिन उन्होंने जाति आधारित आरक्षण को समाप्त कर केवल आर्थिक आधार लागू करने की सिफारिश नहीं की थी।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या आगे चलकर व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता है। फिलहाल अधिकांश राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
