चीन में ‘मधुबनी पेंटिंग’ की गूंज, शंघाई में आयोजित हुआ विशेष वर्कशॉप
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: चीन में भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चल रहे समारोहों के तहत शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से पारंपरिक भारतीय कला मधुबनी पेंटिंग पर एक विशेष इंटरैक्टिव वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व कांसुल जनरल श्री प्रतीक माथुर ने किया।
इस कार्यक्रम में चीन में रहने वाले भारतीय समुदाय और Friends of India से जुड़े करीब 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य भारत की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना और लोगों को भारतीय परंपराओं से जोड़ना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कांसुल जनरल प्रतीक माथुर ने कहा कि भारत की लोक और सांस्कृतिक परंपराएं देश की विशिष्ट पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये परंपराएं न केवल भारतीय समुदाय को एकजुट करती हैं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने में भी मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि मधुबनी कला बिहार के मिथिला क्षेत्र से उत्पन्न हुई है, जिसका भारत के सभ्यतागत इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में विशिष्ट स्थान है।
As part of the ongoing celebrations in China for the 80th anniversary of 🇮🇳 Independence Day, Team CGI, Shanghai led by CG Shri Pratik Mathur organized an interactive workshop today dedicated to the traditional Indian art of #Madhubani. The event was attended by a large group of… pic.twitter.com/X9dbT5PLgh
— India In Shanghai (@IndiaInShanghai) August 10, 2026
भारतीय कला को नई तकनीक से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम के दौरान कांसुल जनरल ने शंघाई के प्रतिष्ठित Shanghai Jincai International School के युवा छात्रों हान और लियू से भी मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया।
दोनों छात्र हाल ही में छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत भारत की यात्रा कर चुके हैं। भारत यात्रा के बाद वे पारंपरिक भारतीय कला रूपों, विशेष रूप से मधुबनी कला के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर समझ विकसित करने के उद्देश्य से एक अभिनव टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मधुबनी कला पर आयोजित इस कार्यशाला ने भारतीय समुदाय के साथ-साथ भारत के मित्रों को भारतीय लोक कला को करीब से समझने और उससे जुड़ने का अवसर दिया। कार्यक्रम को भारत की सांस्कृतिक विरासत को चीन में प्रदर्शित करने और दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक संवाद एवं आपसी समझ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
