राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने पर चीन का बड़ा बयान, मतभेदों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करेंगे
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर चीन की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि चीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत के साथ मिलकर काम करेगा और दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाएगा।
चीनी राजदूत ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने लिखा, “चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं।”
लगातार तीसरे साल होगी मोदी-शी की मुलाकात
मोदी और शी जिनपिंग के बीच यह लगातार तीसरे साल होने वाली मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेता कज़ान और तियानजिन में मुलाकात कर चुके हैं।
शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव पैदा हो गया था। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है।
शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को बीजिंग से रवाना हुए और नई दिल्ली पहुंच गए। चीनी राजदूत ने कहा कि चीन भारत के साथ कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करने और मतभेदों को सही तरीके से संभालने पर जोर दिया।
शू फेइहोंग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करेगा और द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक एवं रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को “संचार बढ़ाना, सहयोग मजबूत करना, मतभेदों को उचित तरीके से संभालना और अच्छे पड़ोसी तथा एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले साझेदार” बनना चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने भी दिया बयान
मोदी-शी मुलाकात को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दोनों नेताओं की यह लगातार तीसरे साल होने वाली मुलाकात होगी। उन्होंने भी भारत और चीन के बीच संवाद बढ़ाने, सहयोग को मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की बात दोहराई। भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद लंबे समय तक तनाव रहा। दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात किए थे।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कज़ान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं।
BRICS Summit की मेजबानी कर रहा भारत
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक होने वाली है।
बैठक में सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। मोदी-शी वार्ता को भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
