BSPS के 13वें स्थापना दिवस समारोह में डिजिटल दौर की पत्रकारिता पर गंभीर मंथन, Media Council के गठन की आवश्यकता पर जोर

Serious deliberation on digital-age journalism at BSPS's 13th Foundation Day celebration; emphasis placed on the need to constitute a Media Council.चिरौरी न्यूज

विशाखापट्टनम: डिजिटल क्रांति के दौर में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार मिला है, लेकिन हर हाथ में माइक और कैमरा आ जाने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। पत्रकारिता केवल खबर दिखाने का नाम नहीं, बल्कि तथ्य, सत्य, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करने का नाम है।

यह बात वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य वक्ता कृष्णमोहन झा ने विशाखापट्टनम में आयोजित भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ (BSPS) के 13वें स्थापना दिवस समारोह में कही। नव्यांध्र जर्नलिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित समारोह में पत्रकारिता की वर्तमान परिस्थितियों, डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, पत्रकारों के कल्याण और नैतिक पत्रकारिता की आवश्यकता पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

आमंत्रित मुख्य अतिथि गृह मंत्री अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, समारोह में आमंत्रित अन्य अतिथियों, पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों और सदस्यों की उपस्थिति रही तथा विभिन्न वक्ताओं ने पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों और पत्रकारों की भूमिका पर अपने विचार रखे।लोकतांत्रिक व्यवस्था में एथिक्सपूर्ण पत्रकारिता” विषय पर अपने संबोधन में कृष्णमोहन झा ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता के स्वरूप और पहुंच को व्यापक बनाया है। आज कोई भी व्यक्ति अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू कर सकता है और समाचार एवं विचारों को समाज तक पहुंचा सकता है। यह बदलाव अभिव्यक्ति के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ पत्रकारिता की पहचान, विश्वसनीयता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल भी खड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज लगभग हर क्षेत्र और मोहल्ले में कैमरा और माइक के साथ लोग समाचार संकलन करते दिखाई देते हैं। अनेक लोग स्वयं को पत्रकार कहते हैं, लेकिन पत्रकारिता की बुनियादी समझ, तथ्यों की पुष्टि, स्रोतों की विश्वसनीयता और समाचार के दोनों पक्षों को सामने रखने की जिम्मेदारी सभी में समान रूप से दिखाई नहीं देती। कृष्णमोहन झा ने सवाल उठाया कि आखिर इस पूरी व्यवस्था को नियंत्रित कौन करेगा और पत्रकारिता के नाम पर होने वाले गैर-जिम्मेदाराना कार्यों की जवाबदेही किसकी होगी?”

कृष्णमोहन झा ने कहा कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और पेशेवर पत्रकार के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। किसी व्यक्ति के फॉलोअर्स की संख्या, उसकी लोकप्रियता अथवा सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता को पत्रकारिता की पेशेवर कसौटी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की पहचान इस बात से होनी चाहिए कि **समाचार के तथ्यों की पुष्टि किस प्रकार की गई, स्रोत कितने विश्वसनीय हैं, संबंधित पक्ष का दृष्टिकोण सामने रखा गया या नहीं, गलती होने पर उसे सुधारा जाता है या नहीं और पूरी प्रक्रिया में जनहित को कितना महत्व दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते दौर में सरकारों और संस्थाओं के सामने भी यह चुनौती है कि डिजिटल इंफ्लुएंसर और पेशेवर पत्रकारिता के बीच अंतर को किस आधार पर समझा और निर्धारित किया जाए।

वरिष्ठ पत्रकार ने बदलते मीडिया परिदृश्य में नियमन की वर्तमान व्यवस्था पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मीडिया के दौर में विकसित हुई व्यवस्थाओं के सामने आज डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और नए कंटेंट प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

उन्होंने सरकार से बदलते समय और तकनीकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक Media Council के गठन पर विचार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी व्यवस्था का उद्देश्य पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के पेशेवर मानकों, नैतिकता और जवाबदेही को मजबूत करना होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरा सवाल किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का नहीं है। मेरा सवाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को बचाने का है।”

कृष्णमोहन झा ने पत्रकार कल्याण के मुद्दे को भी अपने संबोधन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि समाज पत्रकारों से निर्भीक, निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता की अपेक्षा करता है, लेकिन पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता अभी भी आवश्यक है। श्री झा ने कहा कि पत्रकारिता को मजबूत बनाने के लिए केवल पत्रकारों से नैतिकता और जिम्मेदारी की अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं है। पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए भी संस्थागत प्रयास होने चाहिए।

उन्होंने पत्रकार संगठनों का आह्वान किया कि वे पत्रकारों के कल्याण के साथ-साथ पत्रकारिता की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए भी निरंतर प्रयास करें। अपने संबोधन के समापन में कृष्णमोहन झा ने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ जिम्मेदारी से मुक्त होना नहीं है। स्वतंत्र पत्रकारिता और उत्तरदायी पत्रकारिता एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार का पहला दायित्व समाज के प्रति है और इस दायित्व का निर्वहन करते हुए सत्ता, विपक्ष, संस्थान अथवा किसी भी प्रभाव से ऊपर उठकर तथ्यों और जनहित को प्राथमिकता देना पत्रकारिता की मूल भावना होनी चाहिए।

समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं एवं पत्रकार प्रतिनिधियों ने भी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पत्रकारों के कल्याण, संगठनात्मक एकता, पेशेवर दायित्व और वर्तमान मीडिया परिदृश्य की चुनौतियों पर अपने विचार रखे। BSPS के 13वें स्थापना दिवस समारोह ने पत्रकार एकता और कल्याण के साथ-साथ डिजिटल युग में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, नैतिकता और सामाजिक जवाबदेही को लेकर गंभीर विमर्श का अवसर प्रदान किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *