रूस-ईरान से कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनी, जयशंकर ने रुबियो के सामने उठाई भारत की चिंता
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की और रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों एवं चिंताओं को सामने रखा।
जयशंकर के साथ बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि रूस और ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों को उनकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए तैयार है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों नेताओं ने रूस और ईरान के साथ आर्थिक गतिविधियों में शामिल देशों पर संभावित प्रतिबंधों पर चर्चा की। विभाग ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों में मदद करने की स्थिति में है।
ट्रंप ने साइन किया नया प्रतिबंध कानून
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर किए। कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, कानून के लागू होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर स्वतः 100% टैरिफ लगा दिया गया है; इसके लिए आगे अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई और निर्णय जरूरी होगा।
भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं। ऐसे में नए कानून ने भारत की ऊर्जा खरीद और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर नई अनिश्चितता पैदा की है।
जयशंकर ने कहा- भारत के हित और चिंताएं रखीं
मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X परिर कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने मार्च में कहा था कि अमेरिका को उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। कहा कि उन्होंने SRIA (Sanctioning Russia and Iran Act) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। उन्होंने इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखते हुए बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से खरीद जारी रखने पर जोर देता रहा है।
अमेरिका पहले भी भारत से अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाने की अपेक्षा जाहिर कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने मार्च में कहा था कि अमेरिका को उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। वहीं, भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि उसके लिए 1.4 अरब से अधिक लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और इसके लिए वह स्रोतों में विविधता बनाए रखेगा।
नए अमेरिकी कानून से भारत के सामने एक ओर सस्ती और पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर संभावित असर को लेकर भी सावधानी बढ़ी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन भारत पर किस स्तर के टैरिफ या अन्य कदम लागू करेगा। अमेरिकी कानून में राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, लेकिन किसी देश पर 100% टैरिफ अपने आप लागू नहीं होता।
