खेल खिलाड़ी

स्मृति मंधाना को कप्तानी मिलने में हुई देर? हरमनप्रीत कौर के बाद नई शुरुआत की चुनौती

Was there a delay in Smriti Mandhana getting the captaincy? The challenge of a fresh start after Harmanpreet Kaur.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: हरमनप्रीत कौर के कप्तानी पद से हटने के बाद स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कमान मिलना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की मौजूदा सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार 30 वर्षीय मंधाना को कप्तानी सौंपने में चयनकर्ताओं ने देर कर दी?

हरमनप्रीत कौर ने बीसीसीआई के साथ समीक्षा बैठक के बाद सभी प्रारूपों में भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। 2016 में पहली बार कप्तानी संभालने वाली 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने अपने नेतृत्व का अंत एक बड़ी उपलब्धि के साथ किया। उन्होंने भारत को जापान में लगातार दूसरा एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक दिलाया।

मंधाना थीं कप्तानी की स्वाभाविक दावेदार

2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाली स्मृति मंधाना ने पिछले एक दशक में खुद को दुनिया की शीर्ष बल्लेबाजों में स्थापित किया है। वह तीनों प्रारूपों में 10,000 से अधिक रन बना चुकी हैं।

मंधाना की तकनीक और क्लास हमेशा से उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपने खेल में आक्रामकता और पावर गेम भी जोड़ा है। यही वजह है कि हरमनप्रीत के बाद उन्हें कप्तानी के लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प माना जा रहा था।

चयनकर्ताओं से नाराज थीं मंधाना?

मंधाना के कप्तानी संभालने की चर्चा नई नहीं है। माना जाता है कि वह लंबे समय से चयनकर्ताओं के फैसलों से निराश थीं। भारत के घरेलू मैदान पर वनडे विश्व कप जीतकर आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म करने के बावजूद कप्तानी में बदलाव नहीं किया गया था।

हाल ही में एक इंटरव्यू में मंधाना ने भारतीय टीम की कप्तानी करने की इच्छा जाहिर की थी। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी उन्होंने साफ कहा था कि भारत को अब इससे बड़े टूर्नामेंट जीतने का लक्ष्य रखना चाहिए। इस बीच भारत लगातार दो टी20 विश्व कप में शुरुआती दौर में बाहर हो गया, जिसके बाद खास तौर पर सबसे छोटे प्रारूप में नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि चयनकर्ताओं ने काफी समय तक स्थिति को जस का तस बनाए रखा।

हरमनप्रीत और मंधाना के बीच बढ़ी थी दूरी

कप्तानी का मुद्दा हरमनप्रीत और मंधाना के बीच भी संवेदनशील बन गया था। दोनों खिलाड़ियों के बीच पहले अच्छे संबंध माने जाते थे, लेकिन टीम से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक पिछले कुछ समय से दोनों की सोच में मतभेद बढ़ गए थे, जिसका असर ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी पड़ा।

गुवाहाटी में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में हरमनप्रीत को नेतृत्व में बदलाव के संकेत दिए गए। इसके बाद उन्होंने खुद कप्तानी छोड़ने का फैसला किया।

मिताली राज भी कर चुकी थीं मंधाना की पैरवी

भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज ने भी कुछ समय पहले कहा था कि मंधाना को दो-तीन साल पहले ही वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी सौंप देनी चाहिए थी। मिताली के मुताबिक मंधाना अभी भी वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी कर सकती हैं, जबकि टी20 टीम की जिम्मेदारी किसी युवा खिलाड़ी, जैसे शेफाली वर्मा, को दी जा सकती है।

क्या पुराना विवाद टीम के लिए चुनौती बनेगा?

महिला क्रिकेट में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान विवाद कोई नई बात नहीं है। 2022 विश्व कप के बाद जब हरमनप्रीत ने मिताली राज से वनडे कप्तानी संभाली थी, तब दोनों दिग्गजों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसका असर टीम के भीतर गुटबाजी के रूप में भी देखने को मिला था।

अब हरमनप्रीत अगले दो-तीन साल तक खिलाड़ी के तौर पर खेलना चाहती हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह और मंधाना पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर भारतीय टीम के लिए एक साथ काम कर पाती हैं या नहीं।

भारत ने हाल में एशिया कप और एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि हरमनप्रीत बतौर बल्लेबाज अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में नहीं दिखीं। दूसरी ओर, कप्तानी मिलने के बाद मंधाना पर बल्लेबाजी के साथ नेतृत्व की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। देश की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल मंधाना के सामने अब खुद को एक सफल कप्तान के रूप में साबित करने की चुनौती है। अगर वह बल्लेबाजी और नेतृत्व—दोनों मोर्चों पर सफल रहती हैं, तो भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह बदलाव एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *