योगी आदित्यनाथ के कथित डीपफेक वीडियो पर अधिवक्ता रीना एन सिंह ने निर्वाचन आयोग से की शिकायत, तत्काल कार्रवाई की मांग
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर महंत श्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एक कथित AI/डीपफेक वीडियो को लेकर निर्वाचन आयोग के समक्ष शिकायत दाखिल की गई है। सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देकर वीडियो के सार्वजनिक प्रदर्शन और प्रसार पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसा दृश्य या आचरण प्रस्तुत किया गया है, जो वास्तविक रूप से हुआ ही नहीं। अभ्यावेदन में कहा गया है कि राजनीतिक आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और प्रत्येक व्यक्ति को राजनीतिक विचारों की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन किसी राजनीतिक या सार्वजनिक व्यक्ति के ऐसे कथित आचरण का कृत्रिम वीडियो तैयार करना और उसे वास्तविक घटना के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करना गंभीर चिंता का विषय है।

‘राजनीतिक आलोचना और फर्जी सामग्री में अंतर जरूरी’
अभ्यावेदन में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति और आलोचना के लिए पर्याप्त स्थान है। हालांकि, किसी व्यक्ति की छवि, आवाज या व्यवहार को कृत्रिम रूप से बदलकर ऐसी सामग्री तैयार करना, जिससे आम लोगों को वास्तविक घटना का भ्रम हो, लोकतांत्रिक संवाद की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया है कि AI और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग केवल किसी व्यक्ति की छवि का सवाल नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के स्वतंत्र और सूचित निर्णय तथा लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता को भी प्रभावित कर सकता है।
अभ्यावेदन में निर्वाचन आयोग से इस मामले को केवल व्यक्तिगत छवि या प्रतिष्ठा से जुड़े विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं तक पहुंचने वाली सूचना की विश्वसनीयता के संदर्भ में भी देखने का आग्रह किया गया है।
धार्मिक भावनाओं और गोरखनाथ पीठ की गरिमा का भी उठाया मुद्दा
शिकायत में कथित वीडियो के धार्मिक और सामाजिक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि वीडियो में महंत श्री योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ पीठ से संबंधित सामग्री होने के कारण इसके प्रसार से गोरखनाथ पीठ की गरिमा तथा लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका है।
अभ्यावेदन में संबंधित सामग्री की वास्तविकता और उसके निर्माण के उद्देश्य की जांच किए जाने की मांग की गई है। साथ ही यह पता लगाने का अनुरोध किया गया है कि वीडियो कहां से तैयार हुआ, इसे किसने बनाया और इसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने के पीछे कौन लोग या संस्थाएं शामिल हैं।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों और कथित वीडियो की प्रामाणिकता पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
निर्वाचन आयोग के 2024 के निर्देशों का हवाला
अधिवक्ता रीना एन सिंह ने अपने अभ्यावेदन में निर्वाचन आयोग के Commuएनicatioएन एनo. 491/SM_SOP/2024, दिनांक 6 मई 2024 का भी हवाला दिया है। शिकायत में आयोग से यह जांच करने का अनुरोध किया गया है कि कथित डीपफेक सामग्री को हटाने और उसके प्रसार को रोकने से संबंधित आयोग के निर्देशों का पालन किया गया या नहीं।
अभ्यावेदन में विशेष रूप से अधिकतम तीन घंटे के भीतर ऐसी डीपफेक सामग्री को हटाने संबंधी निर्देशों के अनुपालन की जांच की मांग की गई है।
वीडियो के स्रोत और निर्माता की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने निर्वाचन आयोग से कथित वीडियो की पूरी डिजिटल जांच कराने की मांग की है। इसके तहत वीडियो के मूल स्रोत, निर्माता, अपलोड करने वाले व्यक्ति या संस्था तथा इसे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाने वाले लोगों की पहचान किए जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अलावा अभ्यावेदन में कहा गया है कि मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि बाद की जांच या कानूनी कार्रवाई के दौरान उन्हें प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
शिकायत में संबंधित पक्ष से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगे जाने की भी मांग की गई है। अभ्यावेदन में निर्वाचन आयोग से आग्रह किया गया है कि यदि जांच के दौरान प्रथमदृष्टया किसी नियम, निर्देश या कानून का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित पक्ष को Show-Cause एनotice जारी किया जाए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने मामले में कठोर और विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
शिकायत के मुताबिक, चुनाव के दौरान मतदाताओं तक पहुंचने वाली डिजिटल सामग्री का प्रभाव व्यापक हो सकता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक व्यक्ति की छवि, आवाज या बयान से छेड़छाड़ कर बनाई गई सामग्री यदि वास्तविक घटना के तौर पर प्रसारित होती है, तो इससे मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होने की आशंका रहती है।
डीपफेक बना चुनावी प्रक्रिया के लिए नई चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच डीपफेक तकनीक चुनावी लोकतंत्र के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आई है। इस तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या हावभाव को बदलकर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने या सुनने में वास्तविक प्रतीत हो।
चुनावी माहौल में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद उसका प्रभाव मूल स्रोत या उसकी सत्यता की जांच से कहीं अधिक तेजी से फैल सकता है।
इसी संदर्भ में शिकायतकर्ता ने निर्वाचन आयोग से कथित वीडियो के मामले में तत्काल हस्तक्षेप और विस्तृत जांच की मांग की है।
‘मतदाता के सूचित निर्णय की रक्षा जरूरी’
अभ्यावेदन में इस बात पर जोर दिया गया है कि चुनावी लोकतंत्र में मतदाता का स्वतंत्र और सूचित निर्णय सबसे महत्वपूर्ण है। मतदाताओं को किसी उम्मीदवार या राजनीतिक नेता के बारे में गलत या कृत्रिम तरीके से तैयार की गई सामग्री के आधार पर राय बनाने से बचाने के लिए ऐसी सामग्री की पहचान और उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, “AI और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग केवल किसी व्यक्ति की छवि का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के स्वतंत्र एवं सूचित निर्णय और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा आघात है।”
अब निर्वाचन आयोग की ओर से इस शिकायत पर क्या कदम उठाया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि आयोग जांच के बाद कथित वीडियो में चुनावी नियमों या संबंधित निर्देशों का प्रथमदृष्टया उल्लंघन पाता है, तो मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
