अनाहत सिंह ने रचा इतिहास, बनीं विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी

Anahat Singh makes history, becomes the first Indian player to win the World Junior Squash Championship.
(File photo)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारतीय स्क्वैश के इतिहास उपलब्धि हासिल की थी। इसके बाद लगातार 15 वर्षों तक इस प्रतियोगिता पर मिस्र का दबदबा कायम था, जिसे अनाहत ने में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। महज 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला एकल फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकय्या सलेम को एकतरफा मुकाबले में 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की।

अनाहत की यह जीत सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व स्क्वैश के लिए भी ऐतिहासिक रही। वह 2010 के बाद पहली गैर-मिस्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लड़कियों की विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीता है। इससे पहले अमेरिका की अमांडा सोभी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके बाद लगातार 15 वर्षों तक इस प्रतियोगिता पर मिस्र का दबदबा कायम था, जिसे अनाहत ने खत्म कर दिया।

भारत का 20 साल पुराना सपना हुआ पूरा

भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले जोशना चिनप्पा वर्ष 2005 में विश्व जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन उपविजेता रह गई थीं। अनाहत ने पहले फाइनल में पहुंचकर 21 साल का इंतजार खत्म किया और फिर खिताब जीतकर भारतीय स्क्वैश में नया इतिहास रच दिया।

अनाहत सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मिस्र की हबीबा रिज्क को हराया, जबकि सेमीफाइनल में एक और मिस्र की खिलाड़ी बार्ब सामेह को 3-1 से मात देकर फाइनल में आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया। उन्होंने पहला गेम 11-3 से आसानी से जीता, दूसरे गेम में 11-7 से बढ़त बनाई और तीसरे गेम में दबाव के बावजूद 11-9 जगह बनाई।

खिताबी मुकाबले में भी अनाहत ने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया। उन्होंने पहला गेम 11-3 से आसानी से जीता, दूसरे गेम में 11-7 से बढ़त बनाई और तीसरे गेम में दबाव के बावजूद 11-9 से जीत दर्ज कर बिना कोई गेम गंवाए विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

भारत की नई स्क्वैश स्टार बनीं अनाहत

अनाहत सिंह पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। वह हाल ही में विश्व रैंकिंग के टॉप-20 में जगह बना चुकी हैं और कई PSA खिताब भी जीत चुकी हैं। इसके अलावा उनके नाम एशियाई खेलों के पदक और सीनियर स्तर पर कई उल्लेखनीय उपलब्धियां भी दर्ज हैं।

विश्व जूनियर चैंपियन बनने के बाद अब अनाहत को भारतीय स्क्वैश का भविष्य माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर टिकी निगाहें

अनाहत सिंह की इस ऐतिहासिक जीत ने भारत की ओलंपिक उम्मीदों को भी नई उड़ान दी है। वर्ष 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्क्वैश पहली बार शामिल किया जाएगा और ऐसे में अनाहत से देश को पदक की बड़ी उम्मीदें हैं।

विश्व जूनियर चैंपियन का खिताब जीतकर अनाहत सिंह ने न केवल भारतीय स्क्वैश के इतिहास में नया अध्याय लिखा है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दे दिया है कि भारत की यह युवा खिलाड़ी आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश पर राज करने का दम रखती है।

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