कोरोना वायरस: भारत के लिए हर दिन एक नई चुनौती  

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: विश्व के सभी देश कोरोना वायरस से जूझ रहे है। कई देशों में मौत का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।  भारत में भी अब तक़रीबन तीन महीने का समय हो गया जब कोरोना ने पहलीबार दस्तक दिया था, और इन तीन महीनो में भारत की तस्वीर बदल गयी है। अभी न तो बाज़ारों में कहीं भीड़ दिखाई देती है, न सड़कों पर गाड़ियों का मेला। जिधर नज़र दौराइए वहां सन्नाटा के सिवा कुछ नहीं। लगता है जिन्दगी थम सी गयी है। और ये एक खौफनाक मंज़र सा लगता है। एक नज़र डालते हैं कि ये कोरोना इन तीन महीनो में हर शहर,  हर गांव तक कैसे पहुंच गयी है।

30 जनवरी को केरल में इस बीमारी का पहला मामला सामने आया था। किसी ने तब सोचा भी नहीं था कि इस महामारी का संक्रमण इतनी तेज़ी से इतने बड़े देश में फैलेगा। वुहान से लौटे एक छात्र में इस संक्रमण के लक्षण देखे गए थे।  तब से लेकर आज तक इस बीमारी ने 33 हज़ार से ज्यादा को अपनी चपेट में ले लिया है।

जनवरी और फ़रवरी में ये बीमारी ज्यादा नहीं फैली थी, लेकिन 15 मार्च आते आते स्थिति कि भयावहता लोगों को समझ में आने लगी। जहां 2 मार्च को इसके 5 मामले सामने आये थे, वहीँ 15 मार्च तक 107 पर पहुंच गए थे, जबकि 31 मार्च आते-आते मामलों की संख्या 1,397 पर पहुंच चुकी थी। अप्रैल में तो यह बीमारी पूरी तरह हावी हो गयी थी। 1 अप्रैल को जहां मामलों की संख्या 1,834 थी, वो 7 अप्रैल को 4789 पर पहुंच गयी। 14 अप्रैल को संक्रमण ने 10,000 का आंकड़ा पार कर लिया था। 15 अप्रैल तक देश में करीब 11,933 मामले सामने आ चुके थे। वहीँ 21 अप्रैल तक मामलों की संख्या बढ़कर 18,985 हो चुकी थी। आज यानी 30 अप्रैल को कोरोना का आंकड़ा बढ़कर 33,050 पर पहुंच चुकी है। कोरोना के एक ही दिन में सबसे ज्यादा मामला 26 अप्रैल को आया था, जब एक ही दिन में 1,975 नए मामले देखे गए थे।

अमेरिका, इटली या फिर स्पेन की तुलना में भारत की स्थिति कहीं ज्यादा अच्छी है, लेकिन यहाँ भी अबतक एक हज़ार से ज्यादा लोगों को इस बीमारी ने लील लिया है। कुछ राज्यों की हालत बहुत ही ख़राब है, जिसमे महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश शामिल है। महाराष्ट्र में दस हज़ार से ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आ गया है, वहीँ गुजरात और दिल्ली में भी हर एक दिन इसकी संख्या बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब दुबारा लॉकडाउन की घोषणा की तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे कि इस बीमारी से लड़ना इतना आसान नहीं है। कोरोना से लड़ने का एकमात्र उपाय इसके चेन को तोडना ही है, और इसके लिए लोगों को बहार निकलने से रोकना ही एकमात्र उपाय है। पूरे भारत में ३ मई तक लॉकडाउन बढाया गया और यही कारण है कि दूसरे देशों की तुलना में यहाँ कोरोना का ग्रोथ रेट कहीं ज्यादा कम है। इतने दिनों के लॉक डाउन से बेशक हमारी अर्थव्यस्था पर गहरा आघात हुआ है, लेकिन जल्द ही हमारी दृंढ इच्छाशक्ति के बल पर अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आएगी। आज जब भारत के ही नहीं साड़ी दुनियां के लोग महामारी से जूझ रहे है, वैसे में अगर हम एक-दूसरे की मदद करेंगे तो इस त्रासदी से जल्द उबर जायेंगे।

 

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