भारत में खुद ठीक हो रहे हैं कोरोना के मरीज, आईसीएमआर के सर्वे में हुआ खुलासा

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: भारत में कोरोना के मरीज अपने आप ठीक हो रहे हैं, ये जानकारी कुछ अजीब लगे लेकिन यही सच है। और इसकी पुष्टि की है इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के ताज़ा रिसर्च ने।

आईसीएमआर ने 70 जिलों में कोरोना हॉटस्‍पॉट्स में 24 हजार लोगों का सैम्पल एकत्रित किया था जिसमें एंटीबाडीज का पता लगाया जा सके। इसका नतीजा चौकाने वाला आया, क्योंकि हॉटस्‍पॉट्स की एक-तिहाई आबादी संक्रमण के बाद खुद रिकवर हो चुकी थी और उनके शरीर में इसका एंटीबॉडी मौजूद था।

आईसीएमआर के द्वारा ये सर्वे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर समेत 19 राज्यों के हॉटस्पॉट शहरों में किया गया है। यूपी में अमरोहा, सहारनपुर, गौतम बुद्ध नगर, बरेली, बलरामपुर, मऊ, औरैया, गोंडा, उन्‍नाव में भी सर्वे किया गया। वहीं महाराष्ट्र के बीड, नांदेड, परभणी, जलगांव, अहमदनगर, सांगली में सर्वे हुआ।

आईसीएमआर की सर्वे की ये रिपोर्ट कैबिनेट सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ शेयर की गई थी। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से आईसीएमआर की सर्वे रिपोर्ट छापी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीएमआर ने लोगों के बीच कोरोना की पहुंच और इसके असर का पता लगाने के लिए सीरोलॉजिकल सर्वे किया गया था, जिसमें आईसीएमआर ने खास एंटीबॉडीज की पहचान के लिए देश के 70 जिलों में 24 हजार लोगों पर सीरोलॉजिकल सर्वे करवाया है। सर्वे में पाया गया कि कंटेंमेंट जोन में 15 से 30 फीसदी आबादी को संक्रमण हो चुका है, लेकिन कन्टेनमेंट जोन के एक तिहाई से ज्यादा लोग अपने आप ठीक हो गए और उनके शरीर में एंटीबाडीज पाए गए।

किसी इंसान के शरीर में एंटीबॉडीज की मौजूदगी बताती है कि कोई इंसान वायरस का शिकार हुआ है या नहीं। ब्‍लड सैंपल के जरिए इंसान के शरीर में एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है, और एंटीबॉडीज कोरोना संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। संक्रमण के 14 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडीज मिलने लगती है और महीनों तक इंसान के ब्लड सीरम में रहती है।

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