इक्वाडोर ने रचा बड़ा उलटफेर, जर्मनी को 2-1 से हराकर नॉकआउट में बनाई जगह

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: 2026 फीफा विश्व कप के ग्रुप चरण के अधिकांश मुकाबलों तक ऐसा लग रहा था कि इक्वाडोर का सफर जल्द ही समाप्त होने वाला है। टीम ने शानदार रक्षण किया, कई मौके भी बनाए, लेकिन गोल करने में लगातार नाकाम रही। ग्रुप के अंतिम मुकाबले से पहले उसके खाते में एक भी गोल नहीं था और टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था।
ऐसे मुश्किल समय में उसके सामने थी जर्मनी जैसी मजबूत टीम, जिसने ग्रुप चरण में अब तक कोई मुकाबला नहीं गंवाया था और खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। लेकिन मैदान पर जो हुआ, उसने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी।
मुकाबले की शुरुआत जर्मनी के पक्ष में हुई। दूसरे ही मिनट में लेरॉय साने ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। गोल की पुष्टि लंबी वीडियो समीक्षा के बाद हुई और ऐसा लगने लगा कि जर्मनी आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लेगी।
हालांकि, इक्वाडोर ने हार नहीं मानी। पहले दो मैचों में गोल न कर पाने वाली टीम ने इस बार आत्मविश्वास और आक्रामकता दोनों का बेहतरीन प्रदर्शन किया। जॉन येबोआ लगातार जर्मन रक्षण पंक्ति पर दबाव बनाते रहे, जबकि मोइसेस कैइसेडो ने मध्य पंक्ति में खेल की गति को नियंत्रित करते हुए अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा।
लगातार बढ़ते दबाव का असर आखिरकार दिखाई दिया। निल्सन अंगुलो ने टूर्नामेंट में इक्वाडोर का पहला गोल दागकर मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ ही स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल गया और इक्वाडोर के खिलाड़ियों में नया आत्मविश्वास देखने को मिला। इसके बाद जर्मनी ने गेंद पर कब्जा तो बनाए रखा, लेकिन मुकाबले की दिशा बदल चुकी थी। आमतौर पर बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले गोलकीपर मैनुअल नॉयर भी इस मुकाबले में दबाव में नजर आए।
निर्णायक क्षण तब आया, जब एक कॉर्नर के दौरान नॉयर गेंद को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। इसका फायदा उठाते हुए गोंजालो प्लाटा ने सबसे तेज प्रतिक्रिया दिखाई और नजदीक से गेंद को गोल में पहुंचाकर इक्वाडोर को 2-1 की बढ़त दिला दी। कुछ मिनट पहले ही उन्होंने एक आसान मौका गंवाया था, लेकिन इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की।
इसके बाद स्टेडियम में मौजूद इक्वाडोर के समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। जिस टीम के बाहर होने की आशंका जताई जा रही थी, वही अब विश्व कप के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक को अंजाम देने के करीब थी।
मुकाबले के अंतिम दस मिनट बेहद रोमांचक रहे। जर्मनी बराबरी का गोल करने के लिए लगातार हमले करता रहा, जबकि इक्वाडोर के खिलाड़ी पूरी ताकत से रक्षण में जुटे रहे। हर क्लियरेंस, हर टैकल और हर ब्लॉक पर ऐसा जश्न मनाया जा रहा था, मानो टीम ने गोल कर दिया हो।
टचलाइन पर मुख्य कोच सेबास्टियन बेकेसेसे लगातार खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे। सात मिनट का अतिरिक्त समय इक्वाडोर के लिए किसी लंबी परीक्षा से कम नहीं था, लेकिन खिलाड़ियों ने धैर्य और अनुशासन के साथ मुकाबले को अंत तक संभाले रखा।
जैसे ही अंतिम सीटी बजी, पूरा स्टेडियम जश्न में डूब गया। खिलाड़ी मैदान पर एक-दूसरे से गले मिले, जबकि दर्शकों ने ऐतिहासिक जीत का भरपूर आनंद लिया। कई समर्थकों की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि उनकी टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया था।
इस जीत के साथ इक्वाडोर ने टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली आठ टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ-32 में अपनी जगह पक्की कर ली। दूसरी ओर, आइवरी कोस्ट ने कुराकाओ को 2-0 से हराकर ग्रुप ई में उपविजेता के रूप में अगले दौर में प्रवेश किया।
हालांकि जर्मनी ग्रुप विजेता के रूप में नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रहा, लेकिन उस रात की सबसे बड़ी कहानी इक्वाडोर की ऐतिहासिक वापसी और उसकी यादगार जीत रही। इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप में केवल बड़े नाम नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और जुझारूपन भी इतिहास रचते हैं।
