डोनेशन चोरी के मामले में गिरफ्तारी के एक दिन बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय ने इस्तीफा दिया

Ram Mandir trust chief Champat Rai quits day after arrests in donation theft caseचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर दान में गड़बड़ी के मामले ने देश में हड़कंप मचा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद, शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस मामले में नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे दिया। सूत्रों ने ‘इंडिया टुडे’ को यह जानकारी दी।

यह इस्तीफ़ा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच के बाद बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच आया है। SIT ने कथित तौर पर अयोध्या राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन और निगरानी में गंभीर खामियां पाई थीं।

SIT की सिफारिश पर इस मामले में पहली FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी है। यह शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई थी, जो पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल की मृत्यु के बाद सितंबर 2025 में ट्रस्ट में शामिल हुए थे। FIR दर्ज होने के कुछ घंटों बाद ही, गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले में नामज़द सभी आठ आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया।

गिरफ़्तार किए गए लोगों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ ​​टिन्नू शामिल हैं। अधिकारी सभी आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

FIR में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति छिपाने, आपराधिक साज़िश और भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत समान इरादे से किए गए अपराधों से संबंधित आरोप शामिल हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब आरोप लगे कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान का सही प्रबंधन नहीं किया जा रहा था। इसके जवाब में, उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, भंडारण और हिसाब-किताब में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया।

सूत्रों के अनुसार, SIT की शुरुआती जांच में कई स्तरों पर प्रक्रियात्मक खामियां पाई गईं। जांचकर्ताओं को कथित तौर पर कर्मचारियों के सत्यापन में कमियां, संवेदनशील क्षेत्रों में आने-जाने वाले कर्मचारियों की अपर्याप्त जांच, कमज़ोर CCTV निगरानी और मंदिर परिसर से ट्रस्ट कार्यालय और अंततः बैंक में जमा होने तक दान के आवागमन में अनियमितताएं मिलीं।

जांच में दान की गिनती की प्रक्रिया की भी पड़ताल की गई। सूत्रों ने बताया कि दान की गिनती से जुड़े बैंकिंग कार्यों में आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों को शामिल किया गया था, और नियुक्तियों तथा निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए गए थे।

जांचकर्ता भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी, आभूषणों और अन्य कीमती सामानों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं, क्योंकि इन्वेंट्री और दस्तावेज़ीकरण में कथित तौर पर विसंगतियां पाई गई थीं।

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