इंग्लैंड दौरे पर भारत की शर्मनाक हार: क्या गौतम गंभीर की रणनीति बन रही है टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी?
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ब्रिस्टल के मैदान पर जब भारत और इंग्लैंड के बीच आख़िरी टी20 मुकाबला समाप्त हुआ, तब भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर लंबे समय तक गंभीर चर्चा में डूबे दिखाई दिए। दोनों के चेहरों पर निराशा साफ झलक रही थी। आखिर हो भी क्यों न—भारत ने छह मैचों के दौरे में पाँचवीं हार झेली थी।
यह दौरा भारतीय टी20 टीम के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। 2018-19 के बाद पहली बार भारत लगातार दो टी20 सीरीज़ हार गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि टीम लगभग हर मुकाबले में इंग्लैंड के सामने बेबस नजर आई।
शुरुआत आयरलैंड के खिलाफ हार से हुई। पहले इसे एक सामान्य चूक माना गया, लेकिन दूसरी हार ने खतरे की घंटी बजा दी। खुद कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्वीकार किया कि टीम ने आयरलैंड की परिस्थितियों और विरोधी टीम की तैयारी का सही अंदाज़ा नहीं लगाया था।
इंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच बारिश में धुल गया, लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने भारतीय क्रिकेट को झकझोर दिया। ट्रेंट ब्रिज में भारत मात्र 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में उसका दूसरा सबसे छोटा स्कोर था। कोई भी बल्लेबाज़ 20 रन तक नहीं पहुंच सका।
उस हार के बाद अय्यर ने कहा था कि इससे बुरा प्रदर्शन शायद संभव नहीं है। लेकिन दो दिन बाद ब्रिस्टल में इंग्लैंड ने 159 रन का लक्ष्य सिर्फ 13.5 ओवर में हासिल कर लिया। यह मुकाबला 2022 टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल की याद दिला गया, जब इंग्लैंड ने भारत को एकतरफा अंदाज़ में हराया था।
बदला कप्तान, लेकिन बदली नहीं समस्याएं
2022 की हार के बाद भारतीय क्रिकेट ने बड़ा बदलाव किया था। नई सोच अपनाई गई, टीम का ढांचा बदला गया और आक्रामक बल्लेबाज़ी को प्राथमिकता दी गई। इसी रणनीति ने भारत को लगातार दो विश्व कप जिताए।
लेकिन उसी आत्मविश्वास में भारतीय क्रिकेट ने विश्व कप विजेता कप्तान को हटाकर श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंप दी। शुरुआत में यह फैसला साहसिक लगा, लेकिन सिर्फ छह मैचों के भीतर टीम गहरे संकट में पहुंच गई।
अगर एक साल पीछे जाएं तो तस्वीर काफी मिलती-जुलती दिखाई देती है। इंग्लैंड के टेस्ट दौरे पर भी भारत मुश्किलों में था। कप्तानी शुबमन गिल के हाथों में थी और टीम कई रणनीतिक गलतियों के कारण पिछड़ रही थी।
लेकिन ओवल टेस्ट की आखिरी सुबह मोहम्मद सिराज के शानदार स्पेल ने भारत को सीरीज़ बराबर करा दी। उस एक प्रदर्शन ने टीम मैनेजमेंट की कई कमियों को ढक दिया और गौतम गंभीर पर उठने वाले सवाल भी दब गए। इस बार ऐसा कोई चमत्कार नहीं हुआ। न कोई सिराज आया और न ही कोई ऐसा खिलाड़ी जिसने टीम को संकट से बाहर निकाला। परिणामस्वरूप वे सभी कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं, जिन्हें पिछले साल नजरअंदाज कर दिया गया था।
क्या गौतम गंभीर जिम्मेदार हैं?
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी पूरे दौरे में एक जैसी रही—परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में नाकामी। बल्लेबाज़ हर मैच में एक ही अंदाज़ में खेलने की कोशिश करते रहे, चाहे पिच सीम गेंदबाज़ों के लिए मददगार हो या तेज़ हवा बल्लेबाज़ी को मुश्किल बना रही हो। विकेट बचाने और स्ट्राइक रोटेट करने की बजाय लगातार बड़े शॉट खेलने की कोशिश भारत पर भारी पड़ती रही।
ब्रिस्टल में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने मैदान के छोटे हिस्सों का शानदार इस्तेमाल किया, जबकि भारतीय बल्लेबाज़ शुरुआत से ही असमंजस में दिखाई दिए। आयरलैंड दौरे के दौरान खुद श्रेयस अय्यर ने माना था कि टीम ने मैदान के आकार और परिस्थितियों की सही तैयारी नहीं की थी। सवाल उठता है कि अगर कोच और सपोर्ट स्टाफ पहले से इन परिस्थितियों का अध्ययन नहीं करेंगे, तो आखिर उनकी भूमिका क्या रह जाती है?
टीम चयन भी सवालों के घेरे में
पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले और पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वरुण आरोन ने भी टीम मैनेजमेंट के कई फैसलों पर सवाल उठाए।
उनके मुताबिक सबसे बड़े सवाल ये हैं:
- दो टी20 शतक लगाने वाले तिलक वर्मा को उनके पसंदीदा नंबर-3 से हटाकर नीचे क्यों भेजा गया?
- शिवम दुबे की टीम में स्पष्ट भूमिका क्या है?
- बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को लगातार प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
- हर मैच में गेंदबाज़ी आक्रमण बदलने की क्या ज़रूरत थी?
- वॉशिंगटन सुंदर को ऐसे संयोजन में क्यों खिलाया गया, जहां विशेषज्ञ बल्लेबाज़ या गेंदबाज़ ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते थे?
ये सवाल किसी नई टीम से नहीं, बल्कि उस टीम मैनेजमेंट से पूछे जा रहे हैं जिसने विश्व कप जीतने के बाद नई शुरुआत की थी।
आगे क्या?
श्रेयस अय्यर का मानना है कि टीम अभी बदलाव के दौर से गुजर रही है और समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। संभव है कि भारत घरेलू या आसान पिचों पर लौटे और फिर से जीतने लगे।
लेकिन इंग्लैंड ने लगातार दूसरी बार यह साबित कर दिया है कि मुश्किल परिस्थितियों में भारत की रणनीति कमजोर पड़ जाती है। पिछले साल मोहम्मद सिराज की शानदार गेंदबाज़ी ने इन कमियों को छिपा दिया था, लेकिन इस बार कोई चमत्कार नहीं हुआ।
अगर गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट ने अपनी रणनीति, टीम चयन और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सोच में बदलाव नहीं किया, तो भविष्य में भी विदेशी दौरों पर भारत को ऐसे ही कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
