क्या सुशांत को बॉलीवुड की नेपोटिज्म ने मारा है?

आकांक्षा सिंह

मौत किसी के लिए ‘ज़िंदगी की सबसे बड़ी हकीकत’ है तो किसी के लिए ‘जीवन का खूबसूरत सत्य’ और वहीं कई लोग इसे ‘कठोर फल’ की तरह देखते हैं। हर व्यक्ति के लिए मौत का अर्थ परिस्थितियों के हिसाब से होता है। पर यहाँ बात एक ऐसे इंसान, सुशांत सिंह राजपूत की जिसका अच्छा खासा फिल्मी करियर था, वेल सेटल्ड लाइफ थी, फिर भी हार गया।

जी हाँ इसे हारना ही कहते हैं। लेकिन इस हार के पीछे की वजह शायद कुछ और है, जिसके बारे में अब बातें उठने लगी है। शायद कुछ निकल के बाहर आ भी जाय, लेकिन इससे उसका क्या फायदा जो सब कुछ छोड़ के चला गया।

२०२० मायानगरी के लिए एक बुरा साल रहा है, बॉलीवुड इंडस्ट्री ने अपने कई दिग्गज स्टार को खोया है। एक अच्छे भविष्य का दामन छोड़ कर ‘सुशांत सिंह राजपूत’ ने १४ जून २०२० को आत्महत्या का रास्ता चुन लिया। उनके इस रास्ते ने लोगों के बीच एक भीषण बहस का मुद्दा छोड़ दिया है।

नेपोटिज्म बॉलीवुड की कड़वी सच्चाई में से एक है, और सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद नेपोटिज्म का पन्ना एक बार और खुल गया। जिस तरह राजनीति में भाई-भतीजावाद चलता है उसी तरह फ़िल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म। कहा जाता है कि फिल्म इंडस्ट्री पर एक खेमे का राज है जिसे चलाने वाले करण जोहर, संजय लीला भंसाली, सलमान ख़ान, एकता कपूर, भूषण कुमार, आदित्य चोपड़ा, साजिद नाडियाडवाला, जैसे दिग्गज हैं। और यहाँ के फेमस छात्र आलिया भट्ट, अर्जुन कपूर, सोनम कपूर, करीना कपूर, वरुण धवन, सोनाक्षी सिन्हा, सारा अली खान, अभिषेक बच्चन, जान्हवी कपूर, अनन्या पांडेय, उदय चोपड़ा जैसे स्टार किड्स है।

इस खेमे के विरुद्ध भी कुछ लोग है जो कि ना इसके हिस्सेदार है और ना ही होना चाहते है, जैसे कि कंगना राणावत, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव, अनुराग कश्यप, विवेक ओबेरॉय, तापसी पन्नू, विक्की कौशल और कई ऐसे स्टार जिन्होंने नेपोटिज्म का हाथ पकड़ कर फ़िल्मी दुनिया में कदम नहीं रखा बल्कि अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़े है। सुशांत सिंह राजपूत भी सेल्फ मेड थे, और ये बात उन्होंने कहा भी था कि उनका कोई गॉडफादर नहीं है।

सुशांत सिंह राजपूत का काम हमेशा से सराहनीय रहता था। छिछोरे जैसी सुपरहिट मूवी देने के बावजूद भी कोई अवार्ड ना जीत पाना, कला का मज़ाक उड़ाने के बराबर होता है। बी-टाउन के सभी कलाकार  आज के डेट में अपने अनोखे दिखावे के शब्द के साथ सुशांत को श्रद्धांजलि दे रहें है। पर  इसके पीछे की क्या सच्चाई है।

जब तक सुशांत जीवित थे, अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़ रहे थे तब इन बी-टाउन स्टार ने सुशांत को कभी इज़्ज़त नहीं दी, अपनी पार्टीज से हमेशा दूर रखा, उनकी प्रशंसा नहीं कि, उन्हें उनके हक़ की पहचान नहीं दी फिर आज के समय में यह दिखावे का दुख क्यों?

सुशांत की मौत के बाद ऐसे कई वीडियो फॉरवर्ड हो रहे है जिसमें स्टार किड्स ने सुशांत की तौहीन की है, उसकी मेहनत की धज्जियां उड़ाई है यह बोल कर ‘कौन सुशांत’। लेकिन वहीं एक कठोर सत्य ये भी है जो कि इस दोहे से ज़ाहिर होता है ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’ यह पंक्ति हम सब के लिए है जिन्होंने जाने अनजाने में नेपोटिज्म को बढ़ावा दिया है। यह पंक्ति पूरे देश के लिए है जो ग़लत होते हुए चुप चाप देखते है। यह पंक्ति उन सभी लोगों के लिए जो स्टार किड्स की मूवी देखने के लिए फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने जाते है, लेकिन वहीं दूसरे कलाकार की मूवी के बारे में जानते भी नहीं।

सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी ने हम सब पर भी एक सवाल खड़ा कर दिया था। यह बात सोचने वाली है बी-टाउन ने किस हद तक सुशांत का हक़ छीना, जिससे वह अंदर ही अंदर घुटने लगा था। छह फिल्में साइन करने के बाउजूद भी उनके हाथ से सब छीन लिया गया। ऐसे में उनका खुद पर डाउट होना भी तो लाज़मी था। वह अंदर ही अंदर किस दौर से गुज़र रहे होंगे यह किसी को नहीं पता था।

ऐसे में यह कहना बिल्कुल भी ग़लत नहीं होगा कि सुशांत की मृत्यु हम सबके कारण हुई है। हम सब सबकी सोच के कारण हुई है। हम सबके गूंगे- बहरे हो जाने के कारण हो गई है। सुशांत ने सबके सामने एक सवाल खड़ा कर दिया है। जिसका जवाब अब सबको मिल कर निकालना होगा वरना धीरे धीरे कला की एहमियत खत्म हो जाएगी और कुछ रह जायेगा तो वह सिर्फ नेपोटिज्म ।

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