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“कानून-व्यवस्था मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं”: चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों पर मुख्य न्यायाधीश

"Law And Order Not My Domain": Chief Justice On Protests Against Poll Bodyचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों से पैदा हुई स्थिति “उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं” है।

उन्होंने हिंदी में कहा, “यह कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। यह मेरा विषय नहीं है।” पत्रकारों ने उनसे दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों और राष्ट्रीय राजधानी में लगाई गई पाबंदियों के बारे में पूछा था। वे दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की 33वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे।

पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई है। यह मांग वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ में कथित अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर की गई है। वीकेंड पर दिल्ली एक किले में तब्दील हो गई थी, क्योंकि केंद्र सरकार ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नेताओं द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 20,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे।

शनिवार को 5 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे और शहर की सीमाओं पर सघन जांच की गई थी। कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें CJP के शीर्ष नेता और चार पूर्व मुख्यमंत्री शामिल थे।

“सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े खुले हैं”

INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च और उनसे मिलने की मांग पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं। हालांकि, उन्होंने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर विपक्षी नेताओं से मिलने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए क्योंकि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है।

उन्होंने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के बारे में एक पत्र मिला था, और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था। मैंने उसमें उन कारणों का ज़िक्र किया था जिनकी वजह से मैं उनसे नहीं मिल पाऊंगा।”

उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का रुख करने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

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