सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच “बेकार”: कोर्ट

Mumbai Cops' Probe In Sushant Singh Rajput's Ex-Manager's Death "Futile": Courtचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की जांच को “बेकार” बताया है और जांच में कई अनसुलझे सवालों को लेकर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई है।

दिशा सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट’ (ADR) दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने आत्महत्या की थी, लेकिन उनके पिता सतीश सालियन ने पिछले साल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या की गई थी।

जस्टिस एस.वी. कोटवाल और आर.आर. भोसले की बेंच ने गुरुवार को याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने ‘कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर’ (CrPC) की धारा 174 के तहत की गई ADR जांच की समीक्षा की – यह धारा आत्महत्या, दुर्घटना या संदिग्ध परिस्थितियों जैसी मौतों की जांच से संबंधित है।

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिशिर हिरे ने कोर्ट को बताया कि शुरुआती रिपोर्ट फरवरी 2021 में स्वीकार कर ली गई थी, लेकिन मामले को लेकर जनता के मन में उठ रहे संदेहों के बीच दिसंबर 2023 में दोबारा जांच शुरू की गई। बेंच ने CrPC की धारा 174 के तहत जांच दोबारा शुरू करने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने कहा, “आपने इसे दोबारा कैसे शुरू किया? CrPC की धारा 174 में ऐसा कहां लिखा है? इसमें कुछ अस्पष्टता है।” जजों ने कई सालों तक चली जांच की उपयोगिता और कानूनी महत्व पर भी सवाल उठाए। बेंच ने टिप्पणी की, “तो छह साल तक आपने जो जांच की, उसकी क्या अहमियत है? यह सब बेकार है।”

कोर्ट ने कहा कि ADR जांच की सीमाएं होती हैं और ऐसी कार्यवाही के दौरान दर्ज बयानों का सबूत के तौर पर उतना महत्व नहीं हो सकता, जितना औपचारिक आपराधिक जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों का होता है।

‘FIR का विकल्प अभी भी खुला है’

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर हालात ऐसे हों, तो पुलिस के पास FIR दर्ज करने और औपचारिक जांच करने का विकल्प खुला है। कोर्ट ने सवाल किया कि उचित आपराधिक जांच की संभावना को पूरी तरह से क्यों खत्म किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सालियन के पिता सही अदालत में चुनौती दे सकते हैं। बेंच ने शुरुआती जांच में कमियों की ओर भी इशारा किया।

अदालत ने गौर किया कि उस जगह का कोई सीधा CCTV फुटेज नहीं था, जहां से दिशा सालियन के गिरने की बात कही जा रही है। अदालत ने बंद दरवाज़े के बारे में गवाहों के बयानों में अंतर की भी जांच की। अदालत ने देखा कि हालांकि गवाहों ने बंद दरवाज़े का ज़िक्र किया था, लेकिन पंचनामा में उससे जुड़ा कोई नुकसान दर्ज नहीं किया गया था।

अदालत ने पोस्टमॉर्टम जांच से जुड़ी चिंताओं पर भी गौर किया। बेंच ने कहा कि राज्य के नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में पोस्टमॉर्टम दो डॉक्टरों से कराया जाना चाहिए, जबकि दिशा सालियन के मामले में पोस्टमॉर्टम एक ही डॉक्टर ने किया था। दिशा सालियन की मौत 8 जून, 2020 को हुई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, जांच उनकी मौत के तीन दिन बाद की गई थी। रिपोर्ट में उनके सिर, हाथों, पैरों और छाती पर चोटें दर्ज थीं। इसमें कहा गया था कि सिर की चोट जानलेवा थी और नाक व मुंह से खून बहने की बात भी दर्ज थी।

सुनवाई के दौरान बताई गई रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यौन उत्पीड़न या रेप का कोई सबूत नहीं मिला।

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