भारत में कान्स को लेकर असली समझ नहीं, पूरा ध्यान सिर्फ़ रेड कार्पेट की चमक-दमक पर: अनुराग कश्यप
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फ़िल्म समारोहों में गिने जाने वाले कान्स फिल्म फेस्टिवल को लेकर भारत में हर साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता है। फ़िल्म प्रेमियों से लेकर कलाकारों और फ़िल्ममेकर्स तक, हर कोई इस मंच का हिस्सा बनना चाहता है। लेकिन मशहूर फ़िल्ममेकर अनुराग कश्यप का मानना है कि भारत में कान्स को लेकर असली समझ कहीं न कहीं खो गई है और पूरा ध्यान सिर्फ़ रेड कार्पेट की चमक-दमक पर सिमट कर रह गया है।
फ़िल्म आलोचक सुचरिता त्यागी के साथ बातचीत में अनुराग कश्यप ने बेबाक अंदाज़ में कहा, “भारत में कान्स को लेकर जो दीवानगी है, वह सिर्फ़ रेड कार्पेट पर चलने तक सीमित हो गई है। लोग यह भूल जाते हैं कि यह एक फ़िल्म फ़ेस्टिवल है, जिसका मकसद सिर्फ़ ग्लैमर नहीं, बल्कि सिनेमा का जश्न मनाना है।”
जब उनसे पूछा गया कि ओपनिंग डे पर कई लोगों को यह तक पता नहीं चला कि कुछ निर्देशक वहाँ मौजूद थे, तो उन्होंने हल्के व्यंग्य में जवाब दिया, “हम लोग साइड से निकल जाते हैं।”
अनुराग कश्यप ने आगे भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में कई प्रोड्यूसर फ़िल्म फ़ेस्टिवल्स को लेकर असमंजस और डर में रहते हैं। इसी वजह से वे समय पर अपनी फ़िल्में भेजने या सही तरीके से प्रस्तुत करने में चूक जाते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर किसी फ़िल्म को किसी भी कैटेगरी में दिखाए जाने का मौका मिलता भी है, तो कई बार वह सिर्फ़ इसलिए हाथ से निकल जाता है क्योंकि लोग समय पर तैयार नहीं होते।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अनुराग ने कहा कि कान्स केवल रेड कार्पेट या फ़ैशन शो नहीं है। यह दुनिया भर के सिनेमा, विचारों और रचनात्मकता का सबसे बड़ा मंच है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि कान्स मार्केट में आने वाले कई भारतीय सेलिब्रेटी वहाँ फ़िल्में देखने या सिनेमा को समझने में उतनी दिलचस्पी नहीं लेते, जितनी रेड कार्पेट पर दिखाई देने में लेते हैं।
इस साल साल कान्स फिल्म फेस्टिवल में कई भारतीय सितारे नज़र आ चुके हैं। इनमें आलिया भट्ट, तारा सुतारिया, हुमा कुरेशी, अदिति राव हैदरी और उर्वशी रौतेला शामिल हैं। वहीं, कान्स की ‘क्वीन’ कही जाने वाली ऐश्वर्या राय बच्चन के भी इस प्रतिष्ठित समारोह में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
