अब डराने लगे हैं कोरोना मरीजों के आंकड़े, पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा 6654 नए मामले सामने आए

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या हर दिन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। शुरूआती दौर में जब नए मरीजों की संख्या एक दिन में 500 होती थी तो लोग अचंभित हो कर कहते थे, आज इतने सारे कोरोना पोसिटिव हुए। सभी चिंतिति रहने लगे थे, जिधर देखो उधर ही इसके बारे में बातें होती थी, माहौल में कोरोना जैसे घुलमिल गया हो। अब जब एक दिन में हजारों केसेस आ रहे हैं, तो चिंता, डर तो है, लेकिन एक तरह से ये आंकड़े आदत में शुमार हो गए हैं।

आज देश में पिछले 24 घंटों के दौरान संक्रमित मरीजों के 6654 नए मामले सामने आए हैं, जो एक दिन में अबतक सबसे ज्यादा मामले हैं। ताजा आंकड़ों को मुताबिक अबतक एक लाख 25 हजार 101 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और इस से 3720 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में लॉकडाउन के बावजूद भी पिछले 24 घंटों में संक्रमित मरीजों के 6654 नए मामले सामने आए हैं, जो एक दिन में अबतक सबसे ज्यादा मामले हैं। वहीं पिछले 24 घंटों में 137 लोगों की मौत हुई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 1517 मौत हुई है,  जबकि गुजरात में 802, मध्य प्रदेश में 272, और पश्चिम बंगाल में 265 लोगों की मौत हुई है। हालांकि शुरुआती दौर में राजस्थान से ज्यादा मरीजों की संख्या आ रही थी, लेकिन अब वहां स्थिति में थोडा सुधार हुआ है। वहां कोरोना से मरने वाले की संख्या 153 है जबकि दिल्ली में 208, उत्तर प्रदेश में 152,  और आंध्र प्रदेश में 55 लोग इसके शिकार हुए हैं।

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव प्रदीप श्रीवास्तव ने आज 5 गणितीय अनुमानों के आधार पर एक आंकड़ा पेश किया है जिसके अनुसार  अगर लॉकडाउन नहीं लगाया गया होता तो अबतक देश में कोरोना के औसतन 20 लाख मामले सामने आ गए होते जबकि बीमारी से औसतन 54000 लोग जान गंवा चुके होते।
सर्कार का ये दावा कितना सही है ये तो आनेवाला समय ही तय करेगा, लेकिन इतना तो जरुर कहा जा सकता है कि लॉकडाउन से फर्क पड़ा है। हालांकि कुछ लोग लॉकडाउन के टाइमिंग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वैसे नीति आयोग के सदस्य और सरकार की ओर से कोरोना पर बनाए गए एमपावर्ड ग्रुप एक के अध्यक्ष डॉ वी के पॉल ने कहा कि लॉक डाउन ने अपना मक़सद काफ़ी हद तक हासिल किया है। उनके मुताबिक़ लॉक डॉउन ने न सिर्फ बीमार होने और जान देने वालों की संख्या पर ब्रेक लगाई बल्कि सरकार को कम समय में इस महामारी से लड़ने की दिशा में तैयार होने का भी समय दिया।

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