टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह पर रोक से सियासी घमासान, केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

Political uproar over the freeze on TMC's name and election symbol; KC Venugopal questions the Election Commissionचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इसका मकसद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कमजोर करना है।

वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसले को “बीजेपी द्वारा किया गया blatantly unconstitutional hijack” करार दिया और इसे “मोदी जी को देर रात दिया गया जन्मदिन का तोहफा” बताया।

हालांकि,ये वेणुगोपाल के आरोप हैं। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है कि उसका फैसला बीजेपी के कहने पर लिया गया या किसी गुट को कमजोर करने के उद्देश्य से लिया गया। चुनाव आयोग ने पार्टी पर नियंत्रण और पहचान को लेकर चल रहे विवाद पर अंतिम फैसला आने तक दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को AITC का नाम और ‘फूल-घास’ का आरक्षित चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया है।

यह अंतरिम व्यवस्था आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए लागू होगी। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। आयोग के मुताबिक, अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य दोनों गुटों को चुनावी मैदान में समान स्थिति देना है, जबकि पार्टी के नाम और संगठन पर नियंत्रण से जुड़े मूल विवाद पर विचार किया जा रहा है।

वेणुगोपाल ने लगाया बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप

केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर चुनाव आयोग के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें अब ममता के खिलाफ बगावत करने का मौका दिया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए उसे बीजेपी की “कठपुतली” तक कहा।

वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मदद से पार्टी में दलबदल को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि,चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में इन आरोपों की पुष्टि नहीं होती है

अब दोनों गुटों को मिलेंगे अलग नाम और चुनाव चिन्ह

आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को AIT को चुनाव आयोग द्वारा अनुमत नामों और चुनाव चिन्हों में से अपनी पसंद के विकल्प देने होंगे। इसके बाद उपचुनाव के लिए दोनों गुटों कोC के मौजूदा नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह के इस्तेमाल से रोकते हुए वैकल्पिक विकल्प देने को कहा है।

दोनों गुटों को चुनाव आयोग द्वारा अनुमत नामों और चुनाव चिन्हों में से अपनी पसंद के विकल्प देने होंगे। इसके बाद उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

वेणुगोपाल ने अपने बयान में महाराष्ट्र के शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों में आंतरिक विभाजन के दौरान इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली है। हालांकि, इन मामलों और मौजूदा AITC विवाद के बीच समानता को लेकर वेणुगोपाल की व्याख्या एक राजनीतिक आरोप है; चुनाव आयोग का मौजूदा अंतरिम आदेश इस आरोप को स्थापित नहीं करता।

वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग से मांग की है कि ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को वापस दिया जाए। फिलहाल आयोग की अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। अंतिम फैसला पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह पर नियंत्रण को लेकर चल रही मूल सुनवाई के बाद लिया जाएगा। ऐसे में पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों से पहले AITC का यह विवाद राज्य की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन गया है।

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