भारत-उज़्बेकिस्तान रिश्तों में नई गर्माहट, यूरेनियम सप्लाई से लेकर वीज़ा फ्री यात्रा तक बड़े फैसले

Renewed warmth in India-Uzbekistan relations; major decisions ranging from uranium supply to visa-free travel.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को घोषणा की कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच लंबी अवधि के लिए यूरेनियम सप्लाई समझौता किया जाएगा। इस समझौते से भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए ईंधन की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के बीच हुई अहम बैठक के बाद की गई। पीएम मोदी ने कहा, “हम यूरेनियम की सप्लाई के लिए भी लंबे समय का समझौता करेंगे।” उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच बातचीत के प्रमुख नतीजों में शामिल बताया।

परमाणु सहयोग के साथ शहरों की साझेदारी पर भी जोर

भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सहयोग का दायरा सिर्फ परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है। दोनों देश तीन ‘सिस्टर-सिटी’ और ‘सिस्टर-स्टेट’ समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इन समझौतों का उद्देश्य केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने इनके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया, ताकि इन साझेदारियों का असर जमीन पर दिखाई दे और दोनों देशों के शहरों व राज्यों के बीच वास्तविक सहयोग बढ़े।

‘न्यू ताशकंद’ के लिए GIFT City का मॉडल

उज़्बेकिस्तान में इस समय ‘न्यू ताशकंद’ नाम से एक नया शहर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को लेकर भी भारत ने सहयोग की पेशकश की है।

पीएम मोदी ने गुजरात की GIFT City का उदाहरण देते हुए कहा कि उज़्बेकिस्तान इसे नए शहर के विकास के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देख सकता है। उन्होंने परियोजना की प्लानिंग, तकनीक और क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा करने के लिए उज़्बेक प्रतिनिधिमंडल को भारत आमंत्रित करने की पेशकश भी की।

उज़्बेक राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने भारत को “भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार” बताया। उन्होंने कहा कि पिछले साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया।

दोनों देशों के बीच संयुक्त उपक्रमों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। मिर्ज़ियोयेव के मुताबिक, कुछ साल पहले की तुलना में भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच ज्वाइंट वेंचर्स की संख्या करीब सात गुना बढ़ी है।

हर हफ्ते 14 सीधी उड़ानें

लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिहाज से भी दोनों देशों के संबंध तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव ने बताया कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच अब हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।

सीधी उड़ानों में बढ़ोतरी से पर्यटन, कारोबार, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों में संस्कृति की भी अहम भूमिका है। राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव ने लाल बहादुर शास्त्री सेंटर फॉर इंडियन कल्चर और महात्मा गांधी सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने दोनों देशों के लोगों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उज़्बेकिस्तान में भारतीय योग की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ रही है। वहां वर्ष 2018 से राष्ट्रीय योग महासंघ काम कर रहा है। जून में आयोजित योग फेस्टिवल में पूरे क्षेत्र से लोगों ने हिस्सा लिया, जो भारत की सांस्कृतिक पहुंच और दोनों देशों के बीच बढ़ते जन-स्तरीय संपर्क को दर्शाता है।

भारतीयों के लिए 30 दिन तक वीज़ा-मुक्त यात्रा

भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव ने कहा कि उज़्बेकिस्तान भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिनों तक की यात्रा को वीज़ा-मुक्त करने जा रहा है।

इस फैसले से पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ने की उम्मीद है।

भारत और उज़्बेकिस्तान पहले से ही व्यापार, निवेश, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। अब परमाणु ऊर्जा और शहरी विकास जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को भी इस साझेदारी में शामिल किया जा रहा है।

अगर यूरेनियम की दीर्घकालिक सप्लाई, बढ़ता व्यापार, ज्यादा सीधी उड़ानें और वीज़ा-मुक्त यात्रा जैसे फैसलों को एक साथ देखा जाए, तो साफ है कि भारत और उज़्बेकिस्तान के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश आर्थिक, रणनीतिक और लोगों के बीच संपर्क, तीनों स्तरों पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मध्य एशिया में भारत के लिए उज़्बेकिस्तान का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा से लेकर स्मार्ट सिटी और पर्यटन तक फैला यह सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दे सकता है।

पीएम मोदी का ताशकंद दौरा 30 अगस्त को समाप्त होगा, जिसके बाद वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक जाएंगे। पिछले दो दिनों में सामने आए फैसलों से संकेत मिलता है कि भारत और उज़्बेकिस्तान अब आपसी समझौतों को ठोस और जमीन पर दिखने वाले परिणामों में बदलने पर जोर दे रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *