पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में युवा शक्ति और विकसित भारत का रोडमैप
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए अपने संबोधन में युवाओं, आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखा। करीब 75 मिनट के भाषण में उन्होंने Gen Z की आकांक्षाओं, रोजगार, तकनीक, महिला आरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं।
यह प्रधानमंत्री मोदी का लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन रहा। इस मौके पर उन्होंने युवाओं के लिए कई बड़ी घोषणाएं करते हुए कहा कि “युवा ही विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे।”
युवाओं पर खास फोकस
प्रधानमंत्री ने एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स में प्रशिक्षित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आर्थिक बोझ कम होगा।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब हाल के दिनों में परीक्षा पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं में असंतोष देखने को मिला है। भारत की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए सरकार का यह संदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘सप्तधारा’ से विकसित भारत का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण के लिए ‘सप्तधारा’ नाम से सात प्राथमिकताओं का खाका सामने रखा। उन्होंने इसकी तुलना प्राचीन भारत की ‘सप्त सिंधु’ अवधारणा से की।
- मैन्युफैक्चरिंग पावर: भारत को वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद विनिर्माण केंद्र बनाने पर जोर दिया गया। इसमें कंपोनेंट से लेकर तैयार उत्पाद तक के निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही गई।
- कृषि और खाद्य क्षेत्र: मिलेट्स, मसाले और फलों जैसे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने तथा भारत को दुनिया की बड़ी खाद्य शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा गया।
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल दुनिया का बाजार न बने, बल्कि तकनीक का निर्माण भी करे। उन्होंने बताया कि अगले सात-आठ वर्षों में देश में 7-8 सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है।
- गति शक्ति: तेज कनेक्टिविटी के लिए हाई-स्पीड रेल और आधुनिक राजमार्गों सहित मजबूत बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया।
- रक्षा शक्ति: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत को अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई। ड्रोन, हाइपरसोनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा को प्रमुख क्षेत्र बताया गया।
- ऊर्जा सुरक्षा: प्रधानमंत्री ने अगले दशक में पांच परमाणु रिएक्टर शुरू करने और भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा।
- सॉफ्ट पावर: योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति को दुनिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाने का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया।
‘दिमागी नक्सल’ पर PM मोदी का हमला
भाषण में प्रधानमंत्री ने एक नए खतरे के तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी ऐसी विचारधारा वाले लोग मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने सत्ता के गलियारों में छिपे ‘वैचारिक नक्सल’ के रूप में संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई। महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के भाषण के केंद्र में रहा। उन्होंने विपक्षी दलों से राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष से कहा कि वह इसका श्रेय चाहे तो खुद ले, लेकिन देश की माताओं और बहनों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
प्रधानमंत्री ने एक बार फिर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में देश की निर्भरता कम करने पर जोर दिया। उनका संदेश स्पष्ट रहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए युवाओं की ऊर्जा, तकनीकी क्षमता, विनिर्माण और आत्मनिर्भरता को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।
कुल मिलाकर, इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने युवा शक्ति को विकास का इंजन, तकनीक को भविष्य की ताकत और आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय रणनीति के रूप में पेश किया। साथ ही, परीक्षा व्यवस्था, वैचारिक संघर्ष, महिला प्रतिनिधित्व और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं का राजनीतिक और नीतिगत संकेत भी दिया।
