महामारी के बाद के दौर में कौशल-आधारित गेमिंग मानसिक स्वास्थ्य के लिए हो सकती है कारगर

चिरौरी न्यूज़

नई दिल्ली: महामारी के भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों से निपटने तथा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए कौशल-आधारित गेमिंग कारगर हो सकती है, जो वास्तविक जीवन में खेल और घर में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर सकती है। डॉ सुबी चतुर्वेदी, इंडस्ट्री एक्सपर्ट एवं चीफ़ ऑफ़ कॉर्पोरेट एण्ड पब्लिक अफेयर्स, ज़्यूपी ने कहा।

फिक्की द्वारा खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से आयोजित सम्मेलन ‘फिट वुमेन, फिट फैमिली, फिट इंडिया’ में शीर्ष पायदान के नीति निर्माताओं, खेल जगत से जुड़ी महिलाओं तथा तकनीक, समाचार एवं मनोरंजन उद्योग के दिग्गजों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह महिलाओं ने सभी मुश्किलों का सामना करते हुए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों के क्षेत्र में अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

फिट इंडिया मुवमेन्ट पैनल पर बात करते हुए डॉ सुबी चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘कौशल आधारित शैक्षणिक खेल ऑनलाइन गेमिंग के क्षेत्र में एक नया स्थान बना रहे हैं क्योंकि ये स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं और उपयोगकर्ता को सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। जहां एक ओर महामारी के चलते हममें से ज़्यादातर लोग घर में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर ज़्यूपी जैसी कंपनियों ने खेल, गेमिंग और प्रतियोगिता की भावना को बरक़रार रखा है। अब शिक्षा, स्वास्थ्यसेवाओं और प्रशासन के गेमीफिकेशन पर ध्यान दिया जा रहा है तथा बेरोज़गारी, कौशल एवं साक्षरता से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए रणनीतियां बनाई जा रही हैं। शारीरिक स्वास्थ्य निश्चित रूप में मायने रखता है, किंतु हम मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की अनदेखी भी नहीं कर सकते। मेरा मानना है कि तकनीक-उन्मुख इनोवेशन इसी दिशा में एक प्रयास है।’’

तनाव मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट का मुख्य कारण है। आज के दौर में महिलाओं और पुरूषों दोनों को तनाव का सामना करना पड़ता है, किंतु अक्सर महिलाएं अपने काम के स्वभाव, पावर एवं प्रोत्साहन की कमी के चलते इसकी ज़्यादा शिकार होती हैं। सामाजिक परिस्थितियों के चलते महिलाओं को तनाव से निपटने के लिए अनूठे तरीके खोजने होते हैं, ताकि वे स्वस्थ प्रतियोगिता के साथ सफलता की ओर बढ़ सकें। पाया गया है कि प्रतिस्पर्धी माहौल में कौशल आधारित गेमिंग इस दिशा में कारगर हो सकती है तथा तनाव एवं अवसाद से सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। ज़्यादा तनाव वाली मल्टीटास्किंग भूमिकाओं में सक्रिय महिलाओं के लिए ज़रूरी है कि उन्हें काम एवं घर की ज़िम्मेदारियों के बीच खेल का मौका मिले।

मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बात करते हुए मिस अंजु बॉबी, पूर्व-ओलम्पियन ने महिलाओं का सलाह देते हुए कहा, ‘‘भारतीय जीन हमें बहुत मजबूत बनाते हैं, जिसके चलते हम किसी भी काम को कर सकते हैं। किंतु अपने परिवार और काम की ज़िम्मेदारियों के बीच अक्सर हम अपने-आप को भूल जाते हैं। फिट शरीर और फिट मन के बिना अपने परिवार को सपोर्ट करना संभव नहीं है। तो सबसे पहले अपनी खुद की देखभाल करें।’’

मिस दीपा मलिक, प्रेज़ीडेन्ट, पेरालिम्पिक कमेटी ऑफ़ इंडिया ने कहा, ‘‘मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे परिवार में खेल और फिटनैस की संस्कृति रही है। मुझे खुशी है कि हमारे घर से शुरू हुई यह संस्कृति मुझे समाज में मौजूद सभी रूढ़ीवादी अवधारणाओं से निपटने में सक्षम बनाती है। ऐसा सिर्फ इसीलिए संभव हो पाया है कि मेरे जीवन में खेल और फिटनैस का महत्व बहुत अधिक रहा है और यही कारण है कि आज मैं एक फिट व्यक्ति के रूप में आपके सामने मौजूद हूं।’’

ज़्यूपी के नेतृत्व में कई स्टार्ट-अप्स ऑनलाइन कौशल आधारित गेमिंग में इनोवेशन्स पर काम कर रहे हैं। डॉ सुबी चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘हम ऐसे ऐप्लीकेशन्स पर काम करना चाहते हैं जो अपने उपयोगकर्ताओं को सक्रिय रखें, उन्हंे सशक्त बनाएं और उनका मनोरंजन करें। हम एक सशक्त भारत, फिट भारत (स्वस्थ भारत) और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन इनोवेशन्स के साथ हम उद्योग जगत में एक नए सेगमेन्ट की ओर बढ़ रहे हैं जहां रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और नव भारत के कार्यबल के शिक्षा एवं कौशल प्रदान करने में मदद मिलेगी। तकनीक एवं तकनीक-उन्मुख इनोवेशन्स को प्रोत्साहित करने के लिए हमें डिजिटल खामियों को दूर करना होगा ताकि व्यक्तिगत, सामाजिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर परिणामों को सुनिश्चित किया जा सके।’’

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