2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR, सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर लागू नए Merchant Discount Rate (MDR) फ्रेमवर्क पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस नई व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जवाब मांगा है।
मुख्य सवाल यह है कि अगर MDR से मिलने वाली राशि सरकार के पास राजस्व के तौर पर नहीं जा रही है, तो इस चार्ज का कानूनी आधार क्या है? इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनी याचिका
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने MDR की प्रकृति को लेकर सवाल किए। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने कोर्ट को बताया कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार द्वारा वसूली जाने वाली फीस।
केंद्र के मुताबिक, यह राशि UPI पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर ही रहेगी और ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में शामिल बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच वितरित होगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
नई MDR व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि 2,000 रुपये से ज्यादा का हर UPI पेमेंट करने वाले ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। MDR केवल निर्धारित श्रेणी के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक है।
पात्र ट्रांजैक्शन के लिए सामान्य MDR 0.4 प्रतिशत निर्धारित है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर यह अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। उदाहरण के लिए, अगर 10,000 रुपये का कोई ट्रांजैक्शन MDR के दायरे में आता है, तो 0.4 प्रतिशत की दर से MDR 40 रुपये होगा। हालांकि, यह राशि ग्राहक से अलग से वसूलने के लिए नहीं है। सरकार का कहना है कि MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर ही रहेगा।
2,000 रुपये तक का UPI पेमेंट रहेगा फ्री
दो व्यक्तियों के बीच होने वाले UPI पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा, चाहे राशि कितनी भी हो। वहीं, 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी इस MDR व्यवस्था से बाहर रहेंगे। सरकार के मुताबिक, निर्धारित श्रेणी में UPI QR के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी जीरो MDR जारी रहेगा। सरकार का अनुमान है कि करीब 96 प्रतिशत UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
इसका मतलब है कि अगर कोई ग्राहक किसी दुकानदार को UPI के जरिए 1,500 रुपये का भुगतान करता है, तो उसे MDR के नाम पर अतिरिक्त रकम नहीं देनी होगी। नई व्यवस्था में कुछ खास क्षेत्रों के लिए अलग दरें तय की गई हैं। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा।
वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर MDR की दर 0.02 प्रतिशत होगी। इस पर भी अधिकतम 300 रुपये की सीमा रखी गई है। दूसरी ओर, केंद्र का कहना है कि MDR सरकार का राजस्व नहीं है और कारोबारियों को इसे ग्राहकों से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
