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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर BJP-NC आमने-सामने

Uproar in Jammu & Kashmir Assembly; BJP and NC clash over resolution to restore statehood.चिरौरी न्यूज

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पेश प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार को जोरदार हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी के सभी विधायक वेल में पहुंच गए और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को बर्खास्त करने तथा विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे।

हंगामे के दौरान सदन में स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब बीजेपी के एक विधायक ने कांग्रेस विधायकों की ओर माइक्रोफोन फेंकने की कोशिश की। इसके बाद दो बीजेपी नेताओं को मार्शल के जरिए सदन से बाहर निकाला गया। बाद में कांग्रेस के दो सदस्य भी सदन के वेल में पहुंचने की कोशिश करते नजर आए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव में कई सदस्यों ने संशोधन प्रस्ताव दिए हैं। इनमें सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के संशोधन भी शामिल हैं। इन संशोधनों में राज्य का दर्जा बहाल करने के साथ-साथ अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली का उल्लेख करने की मांग की गई है।

हालांकि, प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ सबसे विवादित मुद्दा बन गया है। बीजेपी इस संदर्भ का कड़ा विरोध कर रही है और इसे ‘राष्ट्रविरोधी’ तथा ‘पाकिस्तानी एजेंडा’ बता रही है। बीजेपी विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं।

अमित शाह से मिले सुनील शर्मा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर विधानसभा के मौजूदा सत्र और राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा की।

शर्मा ने उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ देकर वह राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह उचित समय पर किया जाएगा।

शर्मा ने सवाल उठाया कि इस समय 1953 से पहले की स्थिति और स्वायत्तता के मुद्दे को प्रस्ताव में शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने 2000 में तत्कालीन विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता प्रस्ताव का भी उल्लेख किया।

26 जून 2000 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें तत्कालीन राज्य की 1953 से पहले की संवैधानिक स्थिति बहाल करने की मांग की गई थी। उस दौर में जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री और सदर-ए-रियासत के पद हुआ करते थे तथा केंद्र के साथ राज्य के संवैधानिक संबंध मौजूदा व्यवस्था से अलग थे।

नारेबाजी के बीच सदन आधे घंटे के लिए स्थगित

लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद बीजेपी विधायक फिर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इस दौरान उन्होंने “हम देश का विघटन नहीं होने देंगे” जैसे नारे लगाए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि वह पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय बीजेपी नेतृत्व राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के खिलाफ है और इस मुद्दे पर उसका रुख सामने आ गया है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रस्ताव केवल राज्य का दर्जा बहाल करने से संबंधित है और इससे यह भी स्पष्ट होगा कि जम्मू-कश्मीर में कौन राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ। मुख्यमंत्री ने कहा कि “राज्य का दर्जा मेरी सरकार या मेरी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की पहचान और यहां के लोगों के लिए है।” उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए बहुत बलिदान दिए हैं और उसे बीजेपी से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।

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