सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर कहा, चुनाव आयोग की कार्रवाई ने किसी भी कानून या संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: आज सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के कार्यों, विशेष रूप से मतदाता सूची के “विशेष गहन पुनरीक्षण” (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया और चुनाव आयोग के अधिकारों की वैधता को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। अदालत ने कहा कि एसआईआर न तो किसी कानून का उल्लंघन करता है और न ही संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध है।
सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एसआईआर एक अधिक सटीक और समावेशी मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य को मजबूत करता है। अदालत ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया “संविधान में नई ऊर्जा का संचार करती है।”
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर लागू करते समय अपनी कानूनी शक्तियों की सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया है। अदालत के अनुसार, इस प्रक्रिया को “अधिकार क्षेत्र से बाहर (अल्ट्रा वायर्स)” नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह सामान्य मतदाता सूची पुनरीक्षण से अलग और व्यापक प्रकृति का कार्य है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। अपने विस्तृत फैसले में अदालत ने एसआईआर से जुड़े विवादों को चार प्रमुख प्रश्नों में विभाजित किया और प्रत्येक पहलू पर विचार करते हुए प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया।
पहला प्रश्न यह था कि क्या एसआईआर चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। दूसरा, क्या अपनाई गई कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्य के बीच उचित संबंध है। तीसरा, क्या उठाए गए कदम आवश्यक थे और क्या उनके लिए कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध था। चौथा, क्या प्रक्रिया के दौरान लक्ष्यों और नागरिक अधिकारों के बीच उचित संतुलन बनाए रखा गया।
न्यायालय ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाए गए उपायों और समय-समय पर अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों ने चुनावी निष्पक्षता की आवश्यकता और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित किया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने, सुधार करने और शिकायत निवारण के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए।
अंत में सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि एसआईआर प्रक्रिया अपने स्वरूप में पारदर्शिता और सुधार की दिशा में आगे बढ़ने वाली है, जिसने नागरिकों को अपने मतदाता विवरणों को सुधारने और सत्यापित करने के कई अवसर दिए हैं।
इस निर्णय के साथ एसआईआर की वैधता को लेकर पिछले लगभग एक वर्ष से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। यह प्रक्रिया पिछले वर्ष जून में बिहार में शुरू की गई थी और तब से कई याचिकाओं के माध्यम से इसे चुनौती दी जा रही थी।
इस फैसले को चुनाव आयोग के कार्यों की एक महत्वपूर्ण न्यायिक पुष्टि माना जा रहा है, जिसने लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और कानूनी विवाद पर निर्णायक विराम लगा दिया है।
