कश्मीरी पंडित अजय कुमार की बेटी ने कहा, देश का फ़र्ज़ है उनके पिता की मौत का बदला लेना

शिवानी रजवारिया

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता का इतिहास आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। पूरा देश उस मंजर को याद कर तड़प जाता है। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मिले दर्द को शायद ही कभी भरा जा सकें। एक बार फिर कश्मीरी पंडितों के साथ हुए बर्बर अत्याचार की झलक देखने को मिली जब जम्मू में सोमवार को दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में आतंकियों ने कश्मीरी पंडित सरपंच अजय कुमार भारती को गोली मार कर हत्या कर दी।एक बार फिर अजय पंडित की मौत ने कश्मीर में पंडितों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की यादें ताज़ा कर दी है।

अजय कुमार भारती के पिता का कहना है उन्होंने अपने शेर को खो दिया। आतंकियों ने अजय कुमार भारती को गोलिओं का निशाना बनाया जिससे सड़क पर ही उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद सोमवार देर शाम ही अजय पंडित का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग द्वारा जम्मू लाया गया था। जम्मू के शक्ति नगर शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पार्थिक शरीर पर तिरंगा पहनाकर उन्हें देश गौरव से सम्मानित किया गया। पूरा परिवार अजय कुमार भारती की मौत को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा।

वहीं सरपचं की बेटी शीन के अल्फ़ाज़ सुनकर आप की आंखो से भी आंसू आ जाएंगे। अजय कुमार भारती की बेटी शीन के आंसू अपने पापा की गौरव गाथा सुनाते थम नहीं रही।

एक चैनल पर रूबुरू होते हुए शीन ने अपने दर्द को बयान किया। शीन ने सरकार से नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके पिता ने सरकार से सुरक्षा मांगी थी पर उन्हें नहीं मिली। वह गांव के सरपंच थे, उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। जो उनका हक था वही वह मांग रहे थे, वह भी उनको नहीं दिया गया। उनके पिता खुद के नाम के आगे भारती लिखते थे।

देश से बहुत प्यार करते थे। वह पूर्ण रूप से देश की सेवा में समर्पित रहते थे वह सिर्फ एक छोटे से गांव के सरपंच नहीं थे ना ही वह यह मानते थे कि वो सिर्फ अपने गांव तक ही सीमित है वह हमेशा पूरे देश के लिए कुछ करने के लिए तत्पर रहते थे। शीन ने बताया की उनके पिता कहते थे अगर उन्हें कभी कुछ हो जाए तो उनकी पहचान सिर्फ एक भारतीय के नाम से हो।

वह चाहते थे कि मै एक आईपीएस ऑफिसर बनूं और देश को की सेवा करूं। शीन ने भावुक होकर कहा कि जब उनके पिताजी को तिरंगे में लपेटा गया तो उनके लिए वह पल बेहद गौरव का पल था। उनके पूरे परिवार में आज तक कोई तिरंगे में लिपटकर नहीं गया और अगर मौका मिला तो वो ख़ुद भी तिरंगे में लिपटकर ही जाएंगी।

शीन अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहती हैं वह चाहती हैं कि देश उनकी मौत का बदला ले। जिस देश के लिए उनके पिता हर पल खड़े थे आज देश की जिम्मेदारी बनती है कि उनके पिता के प्रति अपना अपना कर्तव्य निभाएं। शीन अपने देश पर गर्व करती हैं वह एक भारतीय हैं। उनका सौभाग्य है उनके पिता कहते थे हिंदुस्तान में जन्म ऐसे ही नहीं मिलता अगर आप हिंदुस्तान में जन्म लिए हो तो आपको देश के लिए कुछ करना ही होगा तभी आप एक असली हिंदुस्तानी कहलाएंगे।

शीन ने कहा उनके पिता को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वह एक कश्मीरी पंडित थे। आतंकियों को क्या जरूरत थी उन्हें मारने की। मेरी गुजारिश है सरकार से कि वह उनके हत्यारों को ढूंढें। उनके पिता ने उस समय से गांव की सेवा की जब कश्मीरी पंडित यहां से चले गए थे, वह किसी से डरते नहीं थी ना ही वह और उनका परिवार किसी से डरता हैं। उन्हें पूरी निर्भीकता के साथ अपना काम किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पिता के लिए आ रहे श्रद्धांजलि के लिए लोगों को शुक्रिया अदा अदा किया और उन लोगों को भी जवाब दिया जो उनके मरने पर नकारात्मकता दिखा रहे हैं। उन्होंने बार-बार इस बात को कहा कि वह उनकी मातृभूमि है वह वापस जाएंगी “ना मेरा बाप किसी से डरता था ना मैं किसी से डरती हूं।”

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