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वैभव सूर्यवंशी को फिर नहीं मिला मौका, ताजा असफलता के बाद संजू सैमसन पर दबाव

Vaibhav Sooryavanshi denied another opportunity; pressure mounts on Sanju Samson following recent failure
(Pic: BCCI)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार अंदाज में शुरुआत की। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले गेंदबाजी करते हुए भारत ने अफगानिस्तान को 156/8 के स्कोर पर रोक दिया और फिर अभिषेक शर्मा की तूफानी बल्लेबाजी के दम पर महज 13.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।

हालांकि, भारत की इस एकतरफा जीत के बावजूद टीम चयन को लेकर बहस शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने को लेकर हो रही है। टीम मैनेजमेंट ने अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत के लिए अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को चुना, लेकिन वह इस मौके का फायदा नहीं उठा सके।

अभिषेक शर्मा ने मचाया तहलका

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा ने शानदार शुरुआत दिलाई। बाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज ने अफगान गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। अभिषेक ने महज 32 गेंदों पर 82 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी पारी में 7 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। उन्होंने मैदान के चारों तरफ बेहतरीन शॉट लगाए और भारत को कुछ ही ओवरों में जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया। भारत ने 156 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.4 ओवर में हासिल कर लिया।

इससे पहले टॉस जीतकर भारत ने गेंदबाजी का फैसला किया। भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने इस फैसले को सही साबित करते हुए शानदार गेंदबाजी की।अर्शदीप ने अपने चार ओवर में सिर्फ 19 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। उनकी बेहतरीन गेंदबाजी के सामने अफगानिस्तान की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई।अफगानिस्तान की ओर से सिर्फ अजमतुल्लाह उमरजई ने दमदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 44 गेंदों पर 64 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को 156/8 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।

संजू सैमसन सिर्फ 10 रन बनाकर आउट

भारत की शानदार जीत के बीच संजू सैमसन का प्रदर्शन एक बार फिर चर्चा में आ गया। वैभव सूर्यवंशी को बाहर रखते हुए सैमसन को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वह सिर्फ 10 रन बनाकर उमरजई का शिकार हो गए। सैमसन का जल्दी आउट होना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाज की जगह के लिए अब उनके सामने कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक खेल से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। उन्हें जून में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया था, लेकिन वहां उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला।

इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। सूर्यवंशी ने उस सीरीज में कुल तीन मुकाबले खेले, लेकिन बड़ा प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं रहे। इसके बाद उन्हें अंतिम मुकाबले की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया और संजू सैमसन की टीम में वापसी हुई।

हालांकि, जिम्बाब्वे के खिलाफ सूर्यवंशी ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ी बनकर अपनी प्रतिभा का जोरदार परिचय दिया।

क्या संजू सैमसन पर बढ़ रहा है दबाव?

भारतीय टीम में संजू सैमसन की जगह को लेकर सवाल कोई नई बात नहीं है। पहले उन्हें रोहित शर्मा और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। बाद में यशस्वी जायसवाल के आने से भी टीम में प्रतिस्पर्धा बढ़ी। हालांकि, 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार दो टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाकर सैमसन ने अपनी दावेदारी मजबूत की थी। इसके बाद ऐसा लग रहा था कि वह भारतीय टी20 टीम के नियमित सदस्य बन सकते हैं।

शुभमन गिल को टी20 फॉर्मेट से अलग रखने के बाद सैमसन ने अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करते हुए भी अच्छी साझेदारी की थी। लेकिन अब वैभव सूर्यवंशी के तेजी से उभरने और ईशान किशन के भी विकल्प के तौर पर मौजूद होने से सैमसन के लिए चुनौती और बढ़ गई है।

एक मैच के बाद फैसला जल्दबाजी होगी, लेकिन बहस तेज

अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मैच में सैमसन का सिर्फ 10 रन पर आउट होना निश्चित तौर पर उनके लिए अच्छी शुरुआत नहीं रही। दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा ने 82 रन की तूफानी पारी खेलकर ओपनिंग में अपनी जगह लगभग और मजबूत कर ली है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सूर्यवंशी और सैमसन के बीच सीधी टक्कर बन गई है? एक तरफ सैमसन का अनुभव है, तो दूसरी तरफ 15 वर्षीय सूर्यवंशी की विस्फोटक प्रतिभा और भविष्य की संभावनाएं हैं। भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने अनुभव और युवा क्षमता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।

मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं के लिए आने वाले मुकाबलों में यह फैसला आसान नहीं होने वाला है। हालांकि, केवल एक मैच के आधार पर सैमसन के भविष्य को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ उनका खराब प्रदर्शन निश्चित रूप से टीम में जगह के लिए जारी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना देगा। अब सीरीज के अगले मुकाबलों में नजर इस बात पर रहेगी कि टीम मैनेजमेंट संजू सैमसन पर भरोसा कायम रखता है या फिर वैभव सूर्यवंशी को मौका देकर भारतीय क्रिकेट के इस युवा सनसनी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का एक और अवसर देता है।

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