विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर वसीम जाफर का बड़ा बयान, ‘मामले को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया था। अब भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने इस फैसले के पीछे की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। जाफर का मानना है कि कोहली जिस तरह से टेस्ट क्रिकेट से अलग हुए, उससे वह नाखुश हो सकते थे। उन्होंने कहा कि विराट जैसे बड़े खिलाड़ी के मामले को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था और वह अभी भी टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए योगदान दे सकते थे।
जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा महसूस हुआ कि कोहली इस बात से थोड़े नाराज थे कि उनके टेस्ट करियर के आखिरी दौर को किस तरह संभाला गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक विराट खुद सामने आकर पूरी स्थिति नहीं बताते, तब तक इस मामले की वास्तविकता को लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।
‘विराट कोहली अभी और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे’
वसीम जाफर ने विराट कोहली के कद और उनकी लोकप्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंचते हैं। उनके मुताबिक, कोहली में अभी टेस्ट क्रिकेट खेलने की क्षमता थी और उनके करियर को इस मुकाम तक पहुंचाने के तरीके पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए था।
जाफर ने कहा, “हां, बिल्कुल। ऐसा लगा कि विराट इस बात से थोड़े नाराज थे कि चीजों को किस तरह संभाला गया। विराट जैसे खिलाड़ी को देखने के लिए स्टेडियम में भीड़ उमड़ती है। उनकी बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है। वह निश्चित रूप से और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। लेकिन जब तक हम सीधे विराट से यह नहीं सुनते कि असल में क्या हुआ था, तब तक हमें पूरी सच्चाई पता नहीं चलेगी।”
इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे कोहली
विराट कोहली के टेस्ट संन्यास से पहले उनके भविष्य को लेकर लंबे समय तक अटकलें लगती रही थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, कोहली इंग्लैंड दौरे पर जाना चाहते थे और टेस्ट क्रिकेट में अपना सफर जारी रखने के इच्छुक थे। इसी दिशा में उन्होंने जनवरी 2025 में दिल्ली की ओर से रणजी ट्रॉफी मुकाबले में भी हिस्सा लिया था।
हालांकि, अप्रैल 2025 में परिस्थितियां बदलने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, चयनकर्ताओं ने कोहली को बताया था कि टीम प्रबंधन इंग्लैंड दौरे के लिए युवा कप्तान को समर्थन देना चाहता है। साथ ही, टीम में उनकी जगह दूसरे खिलाड़ियों की तरह ही प्रदर्शन के आधार पर तय किए जाने की बात भी कही गई थी।
बताया जाता है कि इन परिस्थितियों से निराश होकर कोहली ने चयनकर्ताओं को इंग्लैंड दौरे के लिए उपलब्ध नहीं रहने की जानकारी दी। उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
हालांकि, इन घटनाक्रमों को लेकर कोहली की ओर से पूरी स्थिति का विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
जाफर ने कोहली के इंग्लैंड दौरे की तैयारियों का हवाला देते हुए कहा कि जिस खिलाड़ी ने लंबे प्रारूप में खेलना जारी रखने के लिए तैयारी की हो, उसके मामले में बेहतर तालमेल और संवाद होना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “वह तैयारी कर रहे थे और इंग्लैंड दौरे के लिए खुद को तैयार कर रहे थे। इसलिए इन सभी चीजों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। जैसा कि मैंने कहा, कुछ खिलाड़ियों के मामलों में फैसलों को और अच्छे ढंग से लिया जा सकता था।”
विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। इसके साथ ही उनके 14 साल लंबे टेस्ट करियर का अंत हो गया। उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक शामिल रहे।
चयनकर्ताओं के फैसलों पर भी बोले जाफर
वसीम जाफर ने बातचीत के दौरान भारतीय क्रिकेट में लिए गए बड़े चयन संबंधी फैसलों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ फैसले सफल रहे, जबकि कुछ ने खिलाड़ियों और प्रशंसकों को निराश किया। उनके मुताबिक, फैसले लेना चयन प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन उन्हें लागू करने और खिलाड़ियों तक अपनी बात पहुंचाने के तरीके पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
जाफर ने कहा, “कई बड़े फैसले लिए गए और मुझे लगता है कि उन्हें बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।”
उन्होंने सफेद गेंद और लाल गेंद के क्रिकेट में भारतीय टीम के प्रदर्शन के अंतर पर भी बात की। जाफर के अनुसार, सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में टीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालांकि, उन्होंने इसके लिए चयनकर्ताओं को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानने से इनकार किया।
जाफर ने कहा कि टीम के मैदान पर प्रदर्शन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कोच और कप्तान की होती है। चयनकर्ता खिलाड़ियों का चयन कर सकते हैं, लेकिन मैदान पर कौन-सी रणनीति अपनाई जाएगी और टीम किस तरह खेलेगी, यह कोचिंग स्टाफ और कप्तान के फैसलों पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा, “हमने सफेद गेंद के क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है। लाल गेंद के क्रिकेट में हम उतना अच्छा नहीं खेले, लेकिन यह चयनकर्ताओं की गलती नहीं है। यह कोच और कप्तान की जिम्मेदारी है। वे तय करते हैं कि कौन-सी टीम मैदान पर उतरेगी। चयनकर्ता सिर्फ खिलाड़ियों को चुन सकते हैं।”
फैसले सही भी रहे, लेकिन कुछ मामलों में निराशा हुई
जाफर ने माना कि भारतीय क्रिकेट में चयनकर्ताओं ने कुछ बड़े फैसले लिए, जिनका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ फैसलों से खिलाड़ियों और प्रशंसकों को निराशा हुई और उन पर अधिक समझदारी से काम किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर चयनकर्ताओं का काम ठीक रहा है, लेकिन कुछ मामलों में फैसले लेने और उन्हें संभालने का तरीका बेहतर हो सकता था।
विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर जाफर की टिप्पणी ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के चयन, टीम प्रबंधन और संवाद के तरीके पर बहस छेड़ दी है। जाफर की राय में, कोहली जैसे अनुभवी और लोकप्रिय खिलाड़ी के मामले में बेहतर तालमेल संभव था। हालांकि, संन्यास के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर अंतिम स्पष्टता तभी आएगी, जब कोहली खुद इस पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
