उत्तर प्रदेश की एक शिक्षिका ने 25 स्कूलों में काम करके 1 करोड़ रुपये वेतन लिया, दिए गए जांच के आदेश

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: क्या कोई एक शख्स आज के डिजिटल युग में अपनी उअस्थिति एक साथ २५ जगह दिखा सकता है। आपका जवाब आएगा नहीं, लेकिन रुकिए, ऐसा संभव कर दिखाया है उत्तर प्रदेश की एक शिक्षिका ने जो जो एक साथ २५ स्कूलों में काम कर रही थी, और इसके बदले में तक़रीबन 1 करोड़ रूपये वेतन के रूप में ले रही थी।

एक शिक्षिका जिनका नाम अनामिका शुक्ला है, 25 स्कूलों में महीनों से काम कर रही थीं और एक डिजिटल डेटाबेस होने के बावजूद एक करोड़ रुपये का वेतन निकालने में सफल रहीं। वह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में कार्यरत पूर्णकालिक विज्ञान शिक्षिका थीं और अंबेडकर नगर, बागपत, अलीगढ़, सहारनपुर और प्रयागराज जैसे जिलों के कई स्कूलों में एक साथ काम कर रही थीं।

ये मामला तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश में जब शिक्षकों का एक डेटाबेस बनाया जा रहा था, या कहें कि अपडेट किया जा रहा था। सरकार के द्वारा मानव सेवा पोर्टल पर सभी शिक्षकों का डाटाबेस अपलोड की जा रही थी, जिसमे व्यक्तिगत रिकार्ड्स, जुड़ने व पदोन्नति की तारीख की जरुरत होती है। एक रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद पाया गया कि ये रिकॉर्ड अनामिका शुक्ला का है और एक साथ २५ स्कूलों मंह सूचीबद्ध है।

उत्तर प्रदेश स्कुल शिक्षा महानिदेशक, विजय किरण आनंद ने अब इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं, वैसे शिक्षिका से अब तक सरकार संपर्क नहीं कर पायी है।

अब इस मामले पर योगी सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है। योगी सरकार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और अभी इस बारे में कुछ स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है।

स्कूली शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनंद ने कहा, ”इस तरह की खबरें मीडिया में आने के बाद बेसिक शिक्षा के अपर निदेशक को मामले की जांच के आदेश दिये गये है। अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है, जिस महिला अध्यापक का नाम सामने आया है और उनका कुछ अता-पता नहीं है। खबरों में ऐसा कहा जा रहा है कि महिला अध्यापक ने एक करोड़ रूपये का वेतन लिया है। यह सब सत्य नहीं है, और अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है।”

उन्होंने कहा, ”मामले की जांच की जा रही है और अगर आरोप सही पाये जाते है तो प्राथमिकी कराई जाएगी। वेतन का भुगतान बैंक खाते में भी नहीं हुआ है। मंडलीय अधिकारी जांच कर रहे हैं। अगर कोई अध्यापक गलत तरीके से एक से अधिक स्कूलों में पढ़ा रहा है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

सभी स्कूलों में रिकॉर्ड के अनुसार, वो एक साल से अधिक समय तक इन स्कूलों के रोल पर थीं। केजीबीवी कमजोर वर्गों की लड़कियों के लिए चलाया जाने वाला एक आवासीय विद्यालय है, जहां शिक्षकों को अनुबंध पर नियुक्त किया जाता है। उन्हें प्रति माह लगभग 30,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक कस्तूरबा गांधी स्कूल है।

अनामिका ने इन स्कूलों से वेतन के रूप में फरवरी 2020 तक (13 महीनों में) एक करोड़ रुपए लिए हैं। मैनपुरी की रहने वाली अनामिका शुक्ला को आखिरी बार फरवरी तक रायबरेली के केजीबीवी में काम करते हुए पाया गया था, जब उनका फजीर्वाड़ा सामने आया था। सभी स्कूलों में रिकॉर्ड के अनुसार, शुक्ला एक साल से अधिक समय तक इन स्कूलों के रोल पर थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.