क्या कोरोना है प्रकृति का रक्षक?

शिवानी शर्मा

नई दिल्ली: चीन के वुहान ने निकला एक वायरस जिसने मानव जाति में हाहाकार मचा दिया. इस वायरस ने दुनिया में महामारी फैला दी, लाखों लोगों की जान ले ली, लाखों लोगों के घरों में मातम पसरा हुआ है. अमेरिका जैसे दुनिया का सबसे ताकतवर राष्ट्र भी डर से थर-थर काँप रहा. इस बीमारी ने दुनिया भर में लोगों को नज़रबंद होने पर मजबूर कर दिया है. दुनिया का हर देश लॉकडाउन को अपना चूका है जिसके कारण लोगों को अपने घर में ही रहना पड़ रहा.

इन्सानों के घर में बंद होते ही प्रकृति अपने पुराने स्वरुप में लौट रही है. आये दिन देखने में आ रहा है कि, गंगा और यमुना जैसी नदियों का दूषित पानी साफ़ हो गया है. या फिर अमुक शहरों से हिमालय की चोटियाँ साफ़ साफ़ दिखाई दे रही है. हमने वर्षों से जिस पृथ्वी को अपनी जागीर समझ कर उसके साथ खेला, प्रकृति से छेड़-छाड़ की, खुद के लालच में प्रकृति की खूबसूरती को तारतार कर दिया, आज वो फिर से अपने जख्म को भर रही है.  आज कोरोना वायरस के चलते जब सब कुछ कमोवेश पूरी दुनियां में ठ़प है, हमारी धरती एक बार फिर से खुलकर साँस ले रही है. ऐसा लग रहा मानो ये कोरोना प्रकृति के लिए एंटीडोट का काम कर रहा.

कोरोना वायरस के कारण न सडकों पर गाड़ियों का आवागमन है ना ही फक्ट्रियों से ज़हरीली हवा पर्यावरण को दूषित कर रही, न ही लोगों का समुद्रों और नदियों के किनारे इक्कठा होकर प्रयावार्ण को दूषित करना जिसके कारण प्रकृति वापस से अपने रंग में रंग रही.

देश दुनिया के तमाम जगह पर इसके उदहारण मिल रहे. भारत में जहाँ लुधियाना और सहारनपुर से हिमालय की चोटीयां दिख रही, ओडिशा में सात साल बाद समुद्री तट पर कछुए लाखों की संख्या में आए, पश्चिम बंगाल की गंगा में डॉलफिन मछलियां नज़र आई, गंगा और यमुना जैसी नदियों का दूषित पानी साफ़ हो गया, तो वही इटली के वेनिस की नहरों में जेलिफ़िश नज़र आ रही है.  ऑस्ट्रेलिया की सडकों पर कंगारू घूम रहे, लन्दन में लोमड़ी के छोटे बच्चे सडकों पर मंडराते दिख रहे.

दुनिया भर में ऐसे नज़ारे देखने को मिल रहे जिसे देखकर ये प्रतीत हो रहा की कोरोना वायरस हम इंसानों को एक सबक सिखाने आया है कि अगर हम प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करेंगे तो प्रकृति हमे सबक सिखाने के लिए हर बार भयावह रूप धारण करके आएगी.

कोरोना वायरस इंसानों के लिए बहुत घातक है लेकिन यह प्रकृति को एक बार फिर से उसकी पहचान वापस दे रहा. हम यह कह सकते हैं की कोरोना वायरस मानव जाति के लिए अभिशाप है तो वहीँ यह प्रकृति के लिए वरदान है.

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