गरीबों के राशन पर बिहार और केन्द्रीय मंत्री के बीच तकरार

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: जब सारा देश कोरोना वायरस से एकजुट होकर लड़ रहा है, तब केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री राम विलास पासवान और बिहार के खाद्य मंत्री मदन सहनी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के दायरे को लेकर आमने- सामने आ गए है। दरअसल पूरा मामला बिहार में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के दायरे से बाहर 30 लाख नये परिवारों (कुल 1 करोड़ 50 लाख लोग) को खाद्य सुरक्षा देने को लेकर है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने मंत्री मदन सहनी को पत्र लिखकर एनएफएसए के नियमों के हवाले नये लाभुकों के लिए खाद्यान्न की मांग को खारिज कर दिया है और 2011 की जनगणना के अनुसार एनएफएसए के दायरे से बाहर 14 लाख 4 हजार लाभुकों की सूची भेजने का आग्रह किया है। इसके जवाब में सहनी ने केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि बिहार के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की भी मांग की है। बिहार के खाद्य मंत्री ने कहा है कि केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने 14 लाख 4 हजार लाभुकों के आंकड़े पीडीएस पोर्टल पर डालने की बात की है, जो पहले ही केंद्र सरकार के पोर्टल पर उपलब्ध है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बिहार के मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून-2013, यूपीए सरकार में बना था। इस कानून में प्रावधान किया गया है कि लाभार्थियों की संख्या में कोई संशोधन अगली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद संभव होगा।मदन सहनी ने बताया कि वर्तमान में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार केंद्र से अनाज प्राप्त हो रहा है। बिहार की जनसंख्या में वृद्धि के कारण 30 लाख नए गरीब परिवारों का नाम सामने आया है। बिहार के आंकड़े बिल्कुल दुरुस्त हैं।

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