जब आशा भोसले ने अपनी ‘फेल्ड मैरेज’ के बारे में बात की: “मैं प्रेग्नेंट थी, तब मुझसे घर छोड़ने को कहा गया था”

When Asha Bhosle spoke about her ‘failed marriage’: "When I was pregnant, I was asked to leave the house."चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: प्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोसले के जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक कहानी एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके निजी जीवन के संघर्षों को लेकर पुरानी बातें सामने आई हैं।

आशा भोसले ने महज 16 वर्ष की आयु में गणपतराव भोसले से विवाह किया था, जो उनसे लगभग 15 वर्ष बड़े थे। यह विवाह उन्होंने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध किया था। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि यह प्रेम विवाह था, लेकिन इस फैसले के कारण उनके परिवार, विशेषकर उनकी बहन लता मंगेशकर से उनके संबंधों में दूरियां आ गई थीं। उन्होंने कहा था कि लता मंगेशकर इस विवाह से सहमत नहीं थीं और लंबे समय तक उनसे बात नहीं की।

आशा भोसले ने यह भी खुलासा किया था कि उनके पति नहीं चाहते थे कि वह अपने परिवार के संपर्क में रहें। शुरुआती समय में हालात सामान्य होते दिखे, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ती चली गई। उन्होंने बताया कि इस विवाह में उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

उन्होंने उस कठिन दौर को याद करते हुए कहा था कि जब वह गर्भवती थीं, तब उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद वह अपने मायके लौट आईं। हालांकि, उन्होंने अपने अतीत को लेकर किसी के प्रति कटुता नहीं रखी और कहा कि उन्हें अपने तीनों बच्चों पर गर्व है।

पहले विवाह से अलग होने के बाद आशा भोसले को संगीतकार राहुल देव बर्मन के रूप में जीवनसाथी मिला। दोनों ने 1980 में विवाह किया। बताया जाता है कि राहुल देव बर्मन ने लंबे समय तक उन्हें मनाने के बाद यह रिश्ता संभव किया। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों अलग रहने लगे, लेकिन उनके बीच सम्मान और स्नेह बना रहा, जो 1994 में बर्मन के निधन तक कायम रहा।

आशा भोसले के स्वास्थ्य को लेकर हाल ही में उनकी पोती ज़नाई भोसले ने जानकारी दी थी कि उन्हें अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है।

संगीत की दुनिया में आशा भोसले का योगदान अतुलनीय रहा है। “पिया तू अब तो आजा”, “जाइए आप कहां जाएंगे”, “रंगीला रे” और “शरारा शरारा” जैसे गीतों से उन्होंने श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई। अपने करियर में उन्होंने शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल और पॉप जैसे विभिन्न शैलियों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, वर्ष 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। आशा भोसले का जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक मिसाल भी है।

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