तृणमूल कांग्रेस ने बड़बोले रिजू दत्ता सहित तीन प्रवक्ताओं को 6 साल के लिए निलंबित किया

Trinamool Congress suspends three spokespersons, including the outspoken Riju Dutta, for six yearsचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी विरोधी बयान देने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस ने अपने तीन प्रवक्ताओं — कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष — को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है।

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाकर अनुशासन का उल्लंघन किया था। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई।

इस हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा था। कई नेताओं ने सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू के जरिए पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए थे।

पांच नेताओं को भेजा गया था नोटिस

निलंबन से पहले तृणमूल कांग्रेस ने पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पार्टी ने उनसे 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा था और पूछा था कि अनुशासनहीनता के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। ये नोटिस तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी की अनुशासन समिति के सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से जारी किए गए थे।नोटिस पाने वालों में कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता, कार्तिक घोष के अलावा कृष्णेंदु चौधरी और पापिया घोष भी शामिल थे।

कोहिनूर मजूमदार ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि पार्टी नेताओं को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

वहीं मालदा के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु चौधरी ने भी डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली की आलोचना की थी।

दूसरी ओर रिजू दत्ता उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी सरकार के कदमों की तारीफ की। इस पूरे विवाद पर डेरेक ओ’ब्रायन और पार्टी की अनुशासन समिति की सदस्य चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनावी हार के बाद नेतृत्व किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और आगे भी अनुशासनहीनता पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *