तमिलनाडु में ‘थलपति युग’ की शुरुआत, सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रचा इतिहास
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई, जब अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता संभाल ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में विजय ने हजारों समर्थकों और देशभर से पहुंचे राजनीतिक एवं फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी में पद और गोपनीयता की शपथ ली।
सफेद शर्ट, काले ब्लेज़र और काली पैंट में बेहद सादगीपूर्ण लेकिन प्रभावशाली अंदाज में मंच पर पहुंचे विजय का स्वागत जोरदार नारों और तालियों के साथ हुआ। जैसे ही उन्होंने “सी. जोसेफ विजय येन्नुम नान…” कहकर शपथ लेना शुरू किया, पूरा स्टेडियम “थलपति… थलपति…” के नारों से गूंज उठा। यह पल उनके समर्थकों के लिए किसी फिल्मी क्लाइमैक्स से कम नहीं था।
छह दशक बाद तमिलनाडु को मिला गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री
विजय का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक अभिनेता की राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। लगभग 60 वर्षों बाद राज्य में किसी गैर-द्रविड़ दल के नेता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
अब तक राज्य की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके जैसी द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही थी, लेकिन तमिलगा वेट्री कझगम की जीत ने इस लंबे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया।
भावुक दिखे विजय के माता-पिता
समारोह के दौरान विजय के माता-पिता दर्शक दीर्घा में मौजूद थे और अपने बेटे को इतिहास रचते देख भावुक नजर आए। जैसे ही विजय ने शपथ पूरी की, पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
समारोह में अभिनेत्री तृषा कृष्णन भी खास आकर्षण का केंद्र रहीं। नीली रेशमी साड़ी में पहुंचीं तृषा ने अपने लंबे समय के सह-कलाकार विजय को मुख्यमंत्री बनते देखा। उनके पहुंचते ही प्रशंसकों ने जोरदार स्वागत किया।
इस शपथ ग्रहण समारोह को और भी खास बनाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी चेन्नई पहुंचे। उनकी मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस तमिलनाडु की सत्ताधारी गठबंधन सरकार का हिस्सा बनी है।
राहुल गांधी के मंच पर पहुंचने के साथ ही यह साफ हो गया कि विजय सरकार को विपक्षी दलों का मजबूत समर्थन हासिल है।
कैसे बनी विजय सरकार?
तमिलगा वेट्री कझगम ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया था। हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और पार्टी इससे 10 सीट पीछे रह गई थी।
इसके बाद कांग्रेस ने तुरंत समर्थन देने का ऐलान किया। वहीं वामपंथी दलों, विदुथलाई चिरुथैगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी बिना शर्त समर्थन देकर विजय का रास्ता आसान कर दिया।
इन दलों के समर्थन के बाद विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया।
शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले विजय ने मंच पर पहुंचकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दृश्य ने खासा ध्यान खींचा, क्योंकि तमिलनाडु में हाल के वर्षों में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कई बार टकराव देखने को मिला है।
अब फ्लोर टेस्ट पर टिकी नजरें
शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी निगाहें विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी सरकार को स्थायी रूप से स्थापित करने के लिए विजय को सदन में बहुमत साबित करना होगा।
हालांकि सहयोगी दलों के समर्थन के बाद विजय सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली परीक्षा अब विधानसभा के भीतर शुरू होगी।
तमिलनाडु की राजनीति में ‘थलपति युग’ की शुरुआत हो चुकी है और अब पूरा देश यह देखने को उत्सुक है कि बड़े पर्दे का यह सुपरस्टार सत्ता के मंच पर कितना सफल साबित होता है।
