TMC में घमासान तेज: ममता समर्थक गुट ने बागी नेताओं के खिलाफ दर्ज कराईं चार पुलिस शिकायतें
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में छिड़ी अंदरूनी कलह अब खुलकर कानूनी लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल लेकिन अल्पमत गुट ने पार्टी के बागी और बहुमत वाले धड़े के खिलाफ कोलकाता और आसपास के चार अलग-अलग पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई है।
ममता समर्थक गुट का आरोप है कि बागी नेता पार्टी के आधिकारिक नाम, चुनाव चिह्न और झंडे का अनधिकृत इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही, पार्टी संविधान और संगठनात्मक नियमों की अनदेखी करते हुए नई नेतृत्व व्यवस्था की घोषणा भी की जा रही है।
चार पुलिस थानों में दर्ज हुई शिकायत
जानकारी के मुताबिक, शिकायतें कोलकाता पुलिस के कालीघाट और प्रगति मैदान थाने के अलावा बिधाननगर सिटी पुलिस के न्यू टाउन थाना तथा बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई हैं।
साइबर पुलिस स्टेशन में दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बागी गुट सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं का आरोप है कि पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट टीएमसी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न का उपयोग कर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इतना ही नहीं, बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है, जबकि ममता समर्थक गुट का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष के पद पर अब भी ममता बनर्जी ही वैध रूप से बनी हुई हैं।
‘2022 के सम्मेलन में ममता को आजीवन अध्यक्ष चुना गया था’
ममता समर्थक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2022 में आयोजित संगठनात्मक सम्मेलन में पार्टी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ममता बनर्जी को आजीवन पार्टी अध्यक्ष बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया था।
उनका दावा है कि पार्टी संविधान के अनुसार केवल वे सदस्य प्रतिनिधि बन सकते हैं, जो कम से कम पांच वर्षों से संगठन से जुड़े हों। इसी प्रक्रिया के तहत ममता बनर्जी को अध्यक्ष चुना गया था।
पार्टी नेताओं के अनुसार, टीएमसी का संगठनात्मक सम्मेलन हर पांच वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस हिसाब से अगला सम्मेलन वर्ष 2027 में होना है।
यदि इससे पहले किसी विशेष परिस्थिति में अधिवेशन बुलाने की जरूरत पड़ती है, तो पार्टी संविधान के मुताबिक केवल अध्यक्ष ममता बनर्जी को ही विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है। ऐसे में बागी गुट द्वारा किसी भी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करना पूरी तरह अवैध और पार्टी संविधान के खिलाफ है।
चुनाव आयोग के सामने पहुंचा विवाद
दूसरी ओर, बागी गुट ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर मामला पहले ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष विचाराधीन है।
बागी नेताओं का दावा है कि अब अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग ही करेगा और वही तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस का वैध अधिकार किस गुट के पास रहेगा।
टीएमसी में बढ़ता यह विवाद अब केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी और संगठनात्मक लड़ाई का रूप ले चुका है। एक ओर ममता समर्थक गुट पुलिस कार्रवाई के जरिए बागी नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर बागी धड़ा निर्वाचन आयोग के फैसले का इंतजार कर रहा है। ऐसे में पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर अंतिम फैसला अब निर्वाचन आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा।
