विंबलडन 2026: इतिहास रचेगा चेक गणराज्य, करोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा के बीच होगा फाइनल
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: विंबलडन 2026 के महिला एकल वर्ग में इतिहास रचने वाला फाइनल तय हो गया है। गुरुवार को खेले गए दोनों सेमीफाइनल मुकाबलों में करोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में जगह बनाई। अब शनिवार को पहली बार विंबलडन के इतिहास में दो चेक महिला खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम खिताब के लिए आमने-सामने होंगी। यह 2017 यूएस ओपन के बाद पहला मौका भी होगा, जब किसी ग्रैंड स्लैम महिला एकल फाइनल में एक ही देश की दो खिलाड़ी आमने-सामने होंगी।
मुचोवा ने कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में हराया
सेंटर कोर्ट पर खेले गए पहले सेमीफाइनल में करोलिना मुचोवा ने अमेरिका की सातवीं वरीयता प्राप्त कोको गॉफ को 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया।
करीब 2 घंटे 35 मिनट तक चले इस मुकाबले में मुचोवा ने पहले सेट पर पूरी तरह दबदबा बनाया और दो बार गॉफ की सर्विस तोड़ते हुए आसानी से बढ़त हासिल कर ली। हालांकि दूसरे सेट में गॉफ ने शानदार वापसी की और मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया।
तीसरे सेट का टाई-ब्रेक बेहद रोमांचक रहा। मुचोवा 6-3 से आगे थीं, लेकिन गॉफ ने वापसी करते हुए 10-9 पर मैच प्वाइंट हासिल कर लिया। हालांकि अमेरिकी खिलाड़ी इस मौके को भुना नहीं सकीं और फोरहैंड शॉट नेट में मार बैठीं। इसके बाद मुचोवा ने दो मैच प्वाइंट हासिल किए और आखिरकार गॉफ की एक और गलती के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया।
जीत के बाद मुचोवा ने कहा, “फाइनल में पहुंचना बेहद खास एहसास है। यह मुकाबला उतार-चढ़ाव से भरा रहा। कभी मैं आगे थी तो अगले ही पल मेरे खिलाफ मैच प्वाइंट था। अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं फाइनल में हूं। यहां का माहौल शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।”
नोस्कोवा ने कोस्त्युक को सीधे सेटों में हराया
दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्टा कोस्त्युक को 6-4, 6-4 से हराकर अपने करियर के पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई।
21 वर्षीय नोस्कोवा ने पूरे मुकाबले में शानदार संयम दिखाया। पहले सेट में उन्होंने कोस्त्युक की कमजोर सर्विस का फायदा उठाकर बढ़त बनाई। दूसरे सेट में भी उन्होंने 3-1 की बढ़त हासिल की। हालांकि कोस्त्युक ने वापसी की कोशिश की, लेकिन नोस्कोवा ने दबाव में बेहतरीन खेल दिखाते हुए सिर्फ 1 घंटे 19 मिनट में मुकाबला जीत लिया।
मैच के बाद नोस्कोवा ने कहा, “ग्रैंड स्लैम का सेमीफाइनल कभी आसान नहीं होता। मैंने सिर्फ धैर्य बनाए रखने और शांत रहने की कोशिश की। मुझे पता है कि जब मैं अपना सर्वश्रेष्ठ खेलती हूं तो दुनिया की किसी भी खिलाड़ी को चुनौती दे सकती हूं।”
उन्होंने अपनी हमवतन करोलिना मुचोवा की भी जमकर तारीफ की। “करोलिना शानदार खिलाड़ी होने के साथ-साथ बेहतरीन इंसान भी हैं। मुझे खुशी है कि मैं अपना पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल उनके खिलाफ खेलने जा रही हूं।”
इतिहास रचने को तैयार चेक गणराज्य
शनिवार को होने वाला फाइनल कई मायनों में ऐतिहासिक होगा। यह पहली बार होगा जब विंबलडन महिला एकल फाइनल में दो चेक खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि पिछले चार वर्षों में तीसरी बार विंबलडन महिला एकल का खिताब चेक गणराज्य की खिलाड़ी ही जीतेगी। इससे पहले मार्केटा वोंद्रोसोवा ने 2023 और बारबोरा क्रेजिकोवा ने 2025 में विंबलडन का खिताब अपने नाम किया था। अब सभी की निगाहें शनिवार को होने वाले इस ऐतिहासिक फाइनल पर होंगी, जहां चेक टेनिस को एक और ग्रैंड स्लैम चैंपियन मिलने जा रहा है।
