असम बाढ़: मृतकों की संख्या 75 पहुंची, सरकार ने मुआवजा बढ़ाकर 9 लाख रुपये किया

Assam floods: Death toll reaches 75; government raises compensation to ₹9 lakh.
(Screengrab/X Video)

चिरौरी न्यूज

गुवाहाटी: असम में बाढ़ से हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। मंगलवार को सात और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि प्रभावित लोगों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित परिवारों के लिए कई नई राहत योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें मृतकों और लापता लोगों के परिजनों के लिए मुआवजा बढ़ाकर 9 लाख रुपये करना और सहायता राशि पाने की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है।

सात नई मौतें, सिवसागर सबसे अधिक प्रभावित

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, मंगलवार को हुई सभी सात मौतें सिवसागर जिले के नाजिरा राजस्व क्षेत्र में दर्ज की गईं। हालांकि, राज्य में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है। सोमवार को जहां 4.45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे, वहीं मंगलवार को यह संख्या घटकर 3.32 लाख रह गई।

फिलहाल बाढ़ का असर सिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप महानगर सहित सात जिलों के 622 गांवों पर बना हुआ है। इनमें चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां 1.42 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद सिवसागर (97,074) और जोरहाट (57,371) का स्थान है।

मृतकों के परिजनों को अब मिलेंगे 9 लाख रुपये

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फेसबुक लाइव के जरिए राहत पैकेज की घोषणा करते हुए बताया कि अब बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि 4 लाख रुपये से बढ़ाकर कुल 9 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे।

सरकार ने राहत राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान कर दी है। अब परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट जमा नहीं करनी होगी। संबंधित सर्किल अधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर ही मुआवजा दिया जाएगा।

यदि कोई व्यक्ति बाढ़ में लापता हो जाता है और एक महीने तक उसका शव नहीं मिलता, तो उसके परिवार को भी 9 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार ने सिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के करीब एक लाख गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की अंतरिम आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी ताकि वे तत्काल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकें।

ओरुनोदोई योजना की राशि भी बढ़ाई गई

सरकार ने राहत के तहत इन चार जिलों में ओरुनोदोई योजना के लाभार्थियों को अगस्त महीने में 1,250 रुपये की जगह 2,500 रुपये देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अतिरिक्त राशि की भरपाई राज्य के अन्य जिलों में एक बार के लिए भुगतान में मामूली कटौती कर की जाएगी।

बाढ़ के कारण पढ़ाई प्रभावित होने वाले सिवसागर और चराइदेव के छात्रों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी।

  • उच्च माध्यमिक (हायर सेकेंडरी) छात्रों को 1,000 रुपये
  • स्नातक (यूजी) छात्रों को 3,000 रुपये
  • स्नातकोत्तर (पीजी) छात्रों को 5,000 रुपये

किताबें खरीदने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा डुप्लीकेट मार्कशीट जारी करने का शुल्क भी माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ की नई लहर शुरू होने के बाद पिछले 10 दिनों में मुख्यमंत्री राहत कोष में 26 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई है। इसमें 4,610 लोगों द्वारा किए गए माइक्रो डोनेशन से 60 लाख रुपये भी शामिल हैं। इस राशि का उपयोग अंतरिम राहत, शिक्षा सहायता और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाएगा।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना, वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।

राज्यभर में 81 राहत शिविरों में 32,477 विस्थापित लोग रह रहे हैं, जबकि 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ASDMA के अनुसार, 45,341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है। वहीं, गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धानसिरी (दक्षिण) नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ से कई जिलों में घरों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पशुशालाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 अगस्त से घरों, फसलों, मत्स्य पालन और पशुधन को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे शुरू किया जाएगा, जिसके बाद पात्र परिवारों को मुआवजा वितरित किया जाएगा।

सिवसागर जिले के कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। कई गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं और सैकड़ों परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। दोरीका नदी के किनारे स्थित राजाबाड़ी गांव पूरी तरह जलमग्न है। ग्रामीणों का कहना है कि एक घंटे के भीतर ही बाढ़ का पानी गांव में घुस गया, जिससे उन्हें अपना सामान तक सुरक्षित निकालने का मौका नहीं मिला।

जिला प्रशासन के अलावा कई सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने भी राहत शिविरों में सहायता सामग्री वितरित की है। संगठन के महासचिव समीरन फुकन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लेने की अपील भी की है।

हालांकि कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन हजारों परिवारों के सामने अब अपने घरों और आजीविका को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है।

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