पंजाब में ड्रग तस्करी का बदला पैटर्न? केजरीवाल का BJP पर हमला, रिपोर्ट के दावों पर उठे सवाल
चिरौरी न्यूज
चंडीगढ़: पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच नशीले पदार्थों की तस्करी के पैटर्न में बड़े बदलाव का दावा सामने आया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सीमा से होने वाली ड्रग तस्करी पर काफी हद तक अंकुश लगा है, लेकिन अब इसकी जगह अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी ने लेनी शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के इन दावों के सामने आने के बाद पंजाब की ड्रग समस्या को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा है।
हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि या सत्यापित सरकारी स्रोत फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में इन दावों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
2022 में जब हमारी सरकार बनी थी तो 80% ड्रग्स पाकिस्तान से आती थी। “आप” सरकार ने एंटी ड्रोन सिस्टम लगाकर पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स पर काबू किया। आज केवल 20% ड्रग्स पाकिस्तान से आती हैं। आज 80% ड्रग्स बीजेपी शासित राज्यों से आ रही हैं – गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, यूपी, दिल्ली।… pic.twitter.com/IllELZym91
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 15, 2026
केजरीवाल का BJP पर सीधा हमला
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद पाकिस्तान से होने वाली ड्रग तस्करी में करीब 80 फीसदी की कमी आई है। उनके मुताबिक, अब पंजाब में पहुंचने वाली बड़ी मात्रा में ड्रग्स देश के ही दूसरे राज्यों से आ रही है।
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, “2022 में जब हमारी सरकार बनी थी तो 80% ड्रग्स पाकिस्तान से आती थी। AAP सरकार ने एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाकर पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स पर काबू किया। आज केवल 20% ड्रग्स पाकिस्तान से आती हैं।”
उन्होंने आगे दावा किया कि अब करीब 80 फीसदी ड्रग्स गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों से पंजाब पहुंच रही हैं। केजरीवाल ने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बीजेपी शासित राज्यों में नशे के कारोबार को रोकने में नाकामी रही है या फिर इसे रोकने की इच्छाशक्ति नहीं है।
केजरीवाल द्वारा साझा की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पंजाब में हेरोइन की उपलब्धता में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके पीछे पाकिस्तान सीमा से ड्रग्स की सप्लाई को रोकने के लिए बढ़ाई गई निगरानी और एंटी-ड्रोन सिस्टम को एक अहम वजह बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार से ड्रग्स की तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद तस्करों ने कथित तौर पर अपने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं। अब फोकस अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क पर दिखाई दे रहा है, खासकर फार्मास्युटिकल दवाओं की तस्करी को लेकर चिंता बढ़ी है।
फार्मास्युटिकल ड्रग्स की तस्करी बनी नई चुनौती
रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से दावा किया गया है कि पंजाब पहुंचने वाली करीब 80 फीसदी फार्मास्युटिकल ड्रग्स गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से आती हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2025 से अब तक करीब 11.54 लाख टैबलेट और कैप्सूल जब्त किए जा चुके हैं। इसे ड्रग सप्लाई के रूट में बदलाव के संकेत के तौर पर पेश किया गया है।
हालांकि, इन आंकड़ों और इनके आधार पर निकाले गए निष्कर्षों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट का एक अहम दावा यह है कि पाकिस्तान सीमा पर सख्ती के बाद ड्रग तस्करों ने कथित तौर पर वैध फार्मास्युटिकल सप्लाई चैनलों का दुरुपयोग करना शुरू किया है।
अगर यह पैटर्न व्यापक स्तर पर सही साबित होता है, तो ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई का फोकस केवल सीमा पार तस्करी तक सीमित रखने के बजाय देश के भीतर सक्रिय सप्लाई नेटवर्क, फार्मास्युटिकल डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों और अंतरराज्यीय तस्करी पर भी बढ़ाना होगा।
पंजाब में ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए अब चुनौती सिर्फ पाकिस्तान सीमा से आने वाली खेप को रोकना नहीं रह गई है। यदि अंतरराज्यीय तस्करी में बढ़ोतरी के दावे सही हैं, तो पंजाब के साथ-साथ उन राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी, जहां से कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। इसके लिए अंतरराज्यीय पुलिस सहयोग, फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की निगरानी, संदिग्ध दवाओं की बिक्री पर नजर और तस्करी के नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है।
