भारत-चीन सीमा पर तनाव कम होने के संकेत, LAC के पास PLA की तैनाती में कमी

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 के समापन के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिले हैं। रक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की उत्तरी सीमा के सामने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में कमी दर्ज की गई है।
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में अपनी वेबसाइट पर यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई है। इसमें चीन की सैन्य मौजूदगी और उत्तरी सीमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ओर LAC से जुड़े इलाकों और वहां मौजूद सेना के प्रशिक्षण क्षेत्रों में PLA की 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड की तैनाती का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में सामने आई तैनाती में कमी को भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया में एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
2020 से जारी था सैन्य गतिरोध
पूर्वी लद्दाख में 2020 में LAC पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना रहा। इसके बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई, जिसका उद्देश्य सीमा पर स्थिति को सामान्य बनाना और सैनिकों के बीच टकराव की स्थिति को कम करना था।
इसी प्रक्रिया के तहत 2024 में LAC के कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी और डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। अब 2025 में चीन की सैन्य तैनाती में कमी को इसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत की लगातार रही है डी-एस्केलेशन पर जोर
भारत लंबे समय से LAC पर सैनिकों की संख्या कम करने और सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने की मांग करता रहा है। नई रिपोर्ट में चीन की तैनाती में कमी का उल्लेख ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
हालांकि, सिर्फ सैन्य तैनाती में कमी को सीमा विवाद के पूर्ण समाधान के तौर पर नहीं देखा जा सकता। LAC पर दोनों देशों के बीच भरोसा बहाली, सैनिकों की स्थिति, बुनियादी सैन्य ढांचे और भविष्य में किसी नए गतिरोध को रोकना अभी भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
फिलहाल, रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में PLA की तैनाती में कमी का उल्लेख भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक बातचीत इस प्रक्रिया को किस दिशा में ले जाती है, इस पर खास नजर रहेगी।
